बेमौसम हो रही झमाझम बरसात ने आम जिंदगी तो रोकी ही, धार्मिक आयोजनों को प्रभावित कर दिया है। रविवार को उत्तर भारत के प्रसिद्ध रंगनाथ मंदिर के ब्रह्मोत्सव में रथ मेला के दिन तेज बारिश के कारण ठाकुर गोदारंगमन्नार रथ पर सवार होकर बड़े बगीचा नहीं पहुंच सके। सैकड़ों सालों में ऐसा पहली बार हुआ है जब रथ खींचने का आतुर भक्त आराध्य के दर्शन ही कर पाए।
धर्मनगरी के रंगनाथ मंदिर में आयोजित होने वाला रथ मेला उत्तर भारत के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में से एक है। यहां हर साल चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की नवमी को रथ यात्रा निकाली जाती है। जिसमें ठाकुर गोदारंगमन्नार के भक्त स्वयं रथ को खींचकर मंदिर के गेट से बड़े बगीचा तक ले जाते हैं। लेकिन ब्रज में शनिवार से लगातार हो रही बारिश रविवार को भी नहीं थमी तो तेज बारिश के बीच आयोजन प्रारंभ किया गया।
मंदिर के पुरोहित पंडित विजय मिश्र ने सुबह 7:30 बजे ठाकुर गोदारंगमन्नार की पूजा-अर्चना की। इसके बाद ठाकुरजी को 60 फीट ऊंचे चंदन की लकड़ी से निर्मित रथ में विराजित किया गया। इस दौरान सेवायत बारिश धीमी होने का इंतजार करते रहे और भक्त अपने आराध्य के रथ को खींचने के लिए खड़े थे। तेज बारिश के बावजूद लगातार श्रद्धालु अपने आराध्य के दर्शन करने के लिए पहुंच रहे थे लेकिन मार्ग में कीचड़ होने के कारण मंदिर प्रबंधन को रंगजी मंदिर से बगीचे तक की रथयात्रा स्थगित करनी पड़ी।
इस पर मंदिर प्रबंधक राजकुमार सूद ने कहा कि ठाकुर गोदारंगमन्नार ने अपनी इच्छा के अनुसार भक्तोें को यहां दर्शन दिए हैं। वहीं रथ को खींचकर मनोकामना पूर्ण करने की चाह रखने वाले भक्तों ने सिर्फ दर्शन कर स्वयं को कृतार्थ किया। इधर रथ मेले में रोजगार की तलाश में आए सैकड़ों दुकानदारों को भी बारिश के कारण निराशा हाथ लगी। सामान ज्यों के त्यों रखे थे। छोटे-बड़े झूले भी बंद पड़ रहे।