मथुरा। राजनीति के चाणक्य पूर्वमंत्री और मांट से आठ बार के विधायक श्याम सुंदर शर्मा का किला ढहाते हुए राजेश चौधरी विधायक निर्वाचित हो गए। साल २०१५ में राजेश ने अपनी पत्नी को नौहझील ब्लॉक प्रमुख बनवाकर सेंध लगाना शुरू कर दी थी। इसके बाद उनका हौसला बढ़ता गया। इसी का नतीजा रहा कि राजेश चौधरी ने इस बार श्याम की कुर्सी पर कब्जा जमा लिया।
एबीवीपी से छात्र राजनीति में कदम रखने वाले राजेश ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। बजरंग दल से लेकर भाजयुमो में राष्ट्रीय मंत्री और प्रदेश में महामंत्री बनने के बाद सुबे में अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी। इसके बाद प्रदेश में भाजपा प्रवक्ता बनकर संगठन पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली। केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार के मंत्रियों से नजदीकियां होने के बाद भी संगठन में लगातार सक्रिय रहे।
चुनावी दंगल की बात करें तो राजेश ने पत्नी सुमन को साल २०१५ और २०२१ में नौहझील का ब्लॉक प्रमुख निर्वाचित करवाया। श्यामसुंदर शर्मा के गण में राजेश चौधरी की इस दस्तक साथ ही उन्होंने राजनितिक पंडितों को अपनी धमक का अहसास करवा दिया था। इसी से उनके विधायक बनने की राह भी आसान हो गई थी। वह लगातार जनता में पकड़ बनाते रहे।
इसी के बल पर भाजपा ने भी उन पर विश्वास जताया और पहली बार चुनावी मैदान राजेश ने मांट विधानसभा से ताल ठोकी। १० मार्च को मतगणना के परिणाम में राजेश के विधायक निर्वाचित होने के साथ ही पूर्वमंत्री का किला ढह गया। हालांकि लगातार पूर्वमंत्री इस विधानसभा से जीतते आ रहे थे।
लाल चौक पर झंडा फहराने वाली टीम में थे
छात्र राजनीति से शुरूआत करने वाले राजेश ने छात्र आंदोलन किए। बजरंग दल में रहते हुए गोतस्करों से गोवंशों को आजाद करवाया। भाजयुमो में रहते हुए १९९२ में जब मुरली मनोहर जोशी के नेतृत्व में कश्मीर के लाल चौक पर तिरंगा फहराया गया। तब राजेश चौधरी भी इस टीम का हिस्सा रहे थे। नवनिर्वाचित विधायक का कहना है कि मांट की जनता के विश्वास पर वह खरे उतरेंगे।
हर दल में पैठ रखते हैं श्याम
दिल्ली से लेकर लखनऊ तक पिछले करीब ३५ साल से राजनीतिक चर्चा होती रही कि श्याम के सामने किसी को भी प्रत्याशी बनाओ, हार ही मिलेगी। क्योंकि राजनीतिक दांव-पेंच में माहिर श्याम की काट किसी के पास नहीं थी। जानकार कहते हैं कि श्याम खुद तो चुनाव लड़ते ही हैं, विधान सभा चुनाव में मांट से किसको टिकट मिलनी चाहिए, उसमें भी दखल होता था, क्योंकि श्याम की पैठ हर पार्टी में रही है। लेकिन इस बार जनता धोखा दे गई और मथुरा की राजनीति के चाणक्य चारों खाने चित हो गए।