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Mathura News: ब्रॉडगेज लाइन से चोरी हो रही रेलवे की मिट्टी, जांच शुरू

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मथुरा। वृंदावन ब्रॉडगेज लाइन का काम भले ही पूरा न हो पाया हो, लेकिन ये काम मिट्टी माफिया के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है। ट्रैक पर पड़ी मिट्टी धीरे-धीरे कर चोरी हो रही है। मिट्टी चोरी का मामला संज्ञान में आने के बाद रेलवे अधिकारियों ने प्रकरण की जांच शुरू करवा दी है।
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मथुरा से वृंदावन का सफर आसान बनाने के लिए 12 किलोमीटर लंबी ब्रॉडगेज लाइन बनाई जानी थी। लाइन बनाने के लिए कुछ स्थानों पर पटरी बिछाई गई थी। ट्रैक पर कई जगह पर पीली मिट्टी भी डाली गई थी। ब्रॉडगेज लाइन का काम काफी समय से बंद पड़ा है। समय बीतने के साथ लाइन पर पड़ी मिट्टी धीरे-धीरे कर चोरी हो रही है। सौंख रोड पर बनी ब्रॉडगेज लाइन में मिट्टी चोरी हो जाने की वजह से कई जगह पर गड्ढे हो गए हैं।
रात के समय में मिट्टी माफिया लाइन पर पड़ी मिट्टी चोरी करवा रहे हैं। ट्रैक पर पड़ी मिट्टी का उपयोग करके घर और प्रतिष्ठानों का निर्माण करवा रहे हैं। मिट्टी चोरी का ये खेल रात के वक्त खेला जाता है। जब चारों तरफ अंधेरा हो जाता है। लोग घरों में सो रहे होते हैं, तब मिट्टी माफिया जेसीबी की मदद से मिट्टी की खुदाई करवाते हैं। ट्रैक्टर में भर कर रेलवे की मिट्टी को चुपचाप उठा ले जाते हैं।
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मसानी राधा ऑर्चिड के पास भी ब्रॉडगेज लाइन पर चलती है जेसीबी
सौंख रोड के अलावा मसानी राधा ऑर्चिड और अन्य स्थानों पर पड़ी रेलवे की मिट्टी कम होती जा रही है। स्थानीय लोग दबी जुबान में मिट्टी चोरी होने की बात कहते हैं, लेकिन मिट्टी माफिया के डर से खुलकर कुछ नहीं बोलते। वहीं मिट्टी माफिया मिट्टी का ऑर्डर मिलते ही लाइन पर कहीं से भी मिट्टी भरवा लेते हैं। सरकारी मिट्टी होने के कारण कोई इसका विरोध नहीं करता।
कुछ समय पहले रेलवे ने ड्रोन से करवाया था निरीक्षण
ब्रॉडगेज लाइन पर अतिक्रमण होने की जानकारी के बाद रेलवे अधिकारियों ने लाइन का ड्रोन से सर्वे भी कराया था। ड्रोन के माध्यम से रेलवे अधिकारियों ने अतिक्रमण की स्थिति के साथ ट्रैक पर पड़े रेलवे के सामान की भी जानकारी जुटाई थी। अब ट्रैक से मिट्टी चोरी होने की जानकारी के बाद रेलवे अधिकारियों ने गोपनीय तरीके से मामले की जांच शुरू करवा दी है।
रेलवे ने तैयार किया था प्रोजेक्ट, लोगों के विरोध के चलते नहीं हुआ काम
रेलवे ने इस ट्रैक को ब्रॉडगेज में बदलने की तैयारी की थी। इस प्रोजेक्ट में 2 आरओबी, 17 आरयूबी और 23 छोटे ब्रिज बनाने की योजना थी। प्रोजेक्ट में 6.6 किलोमीटर का एलिवेटेड इंबैकमेंट ट्रैक बनाया जाना था। 4.5 किलोमीटर का लेबल ट्रैक बनना था। मीटर गेज को ब्रॉडगेज में बदलने पर इस ट्रैक पर 4 हॉल्ट और नए रेलवे स्टेशन बनाए जाने थे, लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध के चलते योजना परवान नहीं चढ़ पाई।
वर्जन
ब्रॉडगेज का कार्य अभी रुका है। आगे के कार्यों के लिए विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। इस स्थान पर रेलवे द्वारा सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई जाएगी। जिससे इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
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-प्रशस्ति श्रीवास्तव, मंडल वाणिज्य प्रबंधक
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