मथुरा-वृंदावन के बीच चलने वाली एक मात्र रेलबस सेवा को बंद हुए 11 महीने बीत गए हैं। इससे दैनिक यात्री तो प्रभावित हो ही रहे हैं, यातायात व्यवस्था भी पटरी से उतर गई।
अमर उजाला की ओर से बीते साल दिसंबर माह में चलाए गए अभियान के दौरान भी स्थानीय लोगाें ने मथुरा-वृंदावन के बीच रेलबस दोबारा चलाने की मांग की थी। इस पर भले ही केंद्र सरकार ने ध्यान न दिया हो, लेकिन मुख्यमंत्री की पहल का स्थानीय लोग स्वागत कर रहे हैं। साथ ही रेलबस सेवा के विस्तारीकरण की मांग भी की है।
संत महेशानंद सरस्वती ने कहा कि विश्व पटल पर अलग पहचान रखने वाले वृंदावन के विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने कई योजनाएं दीं, लेकिन किसी ने मथुरा-वृंदावन के बीच यातायात के सुुलभ साधन रेलबस सेवा के विस्तारीकरण के बारे में नहीं सोचा। नतीजा यह रहा कि पंद्रह वर्ष सेवा देने के बाद रखरखाव की बेहतर व्यवस्था न होने के कारण रेलबस सेवा पर ब्रेक लग गया।
स्वामी रामदेवानंद सरस्वती ने कहा कि तकनीकी खराबी के चलते रेलबस सेवा बीते 11 महीने से बंद है। रेलवे के अधिकारियों ने भी इस ओ ध्यान नहीं दिया। अधिकारियों ने कभी नहीं सोचा कि रेलबस सेवा के बंद होने से दैनिक यात्रियों के साथ ही मथुरा जंक्शन से वृंदावन आने वाले श्रद्धालुओं को कितनी परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि रेलबस के संचालन के प्रति केंद्र सरकार भी अपनी जिम्मेदारी को समझे।