मथुरा। जिस सड़क को पीडब्ल्यूडी ने करीब 11 साल पहले फोरलेन में बदला था, उसी सड़क को एक बार फिर फोरलेन किया जा रहा है। इस कार्य के दौरान पहले भी पेड़ों का कटान न पाने की स्थिति में सिर्फ यथासंभव चौड़ाई बढ़ाई गई थी, इस बार भी ऐसा ही किया गया है। लेकिन जन सूचना में इसकी जानकारी मांगे जाने पर पीडब्ल्यूडी के अधिकारी उलझ गए हैं। 10 किलोमीटर में दो बार हुए फोरलेन सड़क निर्माण संबंधी कार्य की बिंदुवार जानकारी नहीं दे पा रहे हैं।
दरअसल, गोविंद नगर निवासी मिलन भाटिया ने जनसूचना अधिनियम के तहत पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता से २००८ में समग्र विकास योजना के तहत मथुरा से वृंदावन तक हुए फोरलेन के कार्य के स्थल की जानकारी मांगी थी। करीब एक साल इंतजार के बाद पीडब्ल्यूडी ने अवगत कराया है कि 2008 में स्वीकृत समग्र विकास योजना के तहत मथुरा से वृंदावन तक 2010 में फोरलेन का कार्य किया गया।
8.82 करोड़ की स्वीकृत लागत पर 5 किलोमीटर में यह कार्य हुआ। इसमें तीन किलोमीटर के दायरे में पागलबाबा मंदिर से मिर्जापुर वाली धर्मशाला गोड़ीयामठ तक फोरलेन किया गया, जबकि दो किलोमीटर में पेड़ों का कटान न होने पर यथासंभव विस्तार किया गया है। आरटीआई मांग रहे मिलन भाटिया ने पीडब्ल्यूडी द्वारा फोरलेन निर्माण और विस्तारीकरण क्षेत्र की किलोमीटर नंबर पर जानकारी मांगी हैं, जो नहीं मिल सकी है। मिलन का कहना है कि सवाल उठता है कि 11 साल पहले भी पेड़ न कटने की स्थिति में यथासंभव विस्तारीकरण का कार्य मथुरा-वृंदावन मार्ग पर किया गया था। एक बार फिर पेड़ काटने की अनुमति न मिलने पर फिर वही कार्य वर्तमान में किया जा रहा है।