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जर्जर भवन, बंद शौचालय हैं स्कूलों की हकीकत

Wed, 30 Nov 2016 12:32 AM IST
अमर उजाला मथुरा
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परिषदीय विद्यालयों में टाट-पट्टी पर पढ़ रहे बच्चे - फोटो : अमर उजाला
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शिक्षा का स्तर सुधारने से पहले शिक्षालयों का स्तर सुधारना जरूरी हो गया है। प्रदेश में परिषदीय विद्यालयों की स्थिति को लेकर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी के मायने शायद यही हैं। कंप्यूटर-टैबलेट के दौर में परिषदीय विद्यालय मोबाइल की डाउन होती बैटरी की तरह हैं। समय बढ़ रहा है, सरकारी स्कूलों में गुणवत्ता गिर रही है।
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भवन, पानी, सफाई जैसी सुविधाओं के नाम पर भी ये विद्यालय कहीं नहीं ठहरते। बुजुर्गों से टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ाई की। चिट्ठी के उस दौर से हम ईमेल तक आ गए लेकिन सरकारी स्कूलों की टाट-पट्टी वहीं है। आज शिक्षा का अधिकार देकर भी नई पीढ़ी के भविष्य पर सवाल हैं क्याेंकि सिस्टम के दावे हकीकत में बदल रहे। मंगलवार को अमर उजाला की टीम इसी सरकारी शिक्षा का सच जानने निकली और जो तस्वीर सामने आई वो कुछ इस प्रकार है...     

शहर के स्कूल: फर्नीचर नाम पर सिर्फ चटाई और दरी
रसिक प्राथमिक पाठशाला सदर बाजार में सुबह करीब 9:30 बजे बच्चे स्वयं ही बैठने के लिए चटाई बिछा रहे थे। इससे पहले बच्चों ने स्कूल की सफाई की फिर पढ़ाई शुरू हो सकी। कमला नेहरू विद्यालय और शांति देवी प्राथमिक पाठशाला बाढ़पुरा में बच्चे दरी पर बैठकर पढ़ रहे थे। शहरी क्षेत्र के स्कूल में शौचालय ठीकठाक स्थिति में मिले। स्वामी श्रद्धानंद प्राथमिक पाठशाला में बच्चे जमीन पर बैठे थे लेकिन बस्ते चौकी पर रखे थे। यहां शौचालय बंद मिला। पूछने पर बताया गया कि सीवर फुल होने के कारण शौचालय बंद हो गए हैं। 
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देहात: शौचालय हैं लेकिन उपयोग में नहीं
मांट के गांव जाबरा के प्राथमिक विद्यालय में ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स ने शौचालय बनवा दिया लेकिन इसमें ताला लगा रहता है। छात्र ही नहीं शिक्षक भी खुले में टायलेट जाते हैं। पूर्व माध्यमिक विद्यालय गांव नगला मौजी और प्राथमिक विद्यालय नगला गड़रिया में भी शौचालय बदहाल हैं। प्रधानाध्यापक तेजवीर सिंह और वीरेंद्र सिंह के अनुसार कई बार अधिकारियों को अवगत कराने के बाद भी शौचालय का निर्माण नहीं हो सका। प्राथमिक विद्यालय सुरीर विजऊ के प्रधानाध्यापक अमलेश गुप्ता ने बताया कि स्कूल में प्रधान को शौचालय का पुनर्निर्माण कराना है। प्रधान मुरारी ने जल्द निर्माण कराने की बात कही। मांट, सुरीर कलां, कराहरी, टैटीगांव में भी स्थिति यही रही। बच्चे दरी पर बैठकर पढ़ाई करते मिले। 

राधाकुंड में जूनियर हाईस्कूल, कन्या प्राथमिक विद्यालय और प्राथमिक पाठशाला एक ही बिल्डिंग में चल रहे हैं। जमीन पर बैठकर पढ़ाई करने वाले बच्चे सड़क पर खड़ी गाड़ी से मिडडेमील स्वयं ही लेकर आते हैं। विद्यालय की दीवार टूटी हुई है, शौचालय गंदगी से अटे हैं। पेयजल के लिए लगा नल खारा पानी देता है। स्कूल के शिक्षक ने बताया कि जूनियर हाईस्कूल में करीब साठ और प्राथमिक विद्यालय में 65 विद्यार्थी हैं। मौके पर 30-30 ही मौजूद मिले। प्राथमिक कन्या पाठशाला में शिक्षिका रजनी रानी अकेली ही बच्चों को पढ़ाती मिलीं। 

राया के प्राथमिक विद्यालय मल्है में बच्चे दरी पर बैठकर पढ़ रहे थे। शिक्षिकाएं बच्चों को पढ़ाने में व्यस्त थीं लेकिन छात्र संख्या कम दिखी। ग्राम भंकरपुर बसैला में पूर्व माध्यमिक विद्यालय के बच्चे प्राथमिक विद्यालय में बैठकर पढ़ते मिले। पूछने पर बताया कि जूनियर हाईस्कूल का भवन बिना धन के अधर में लटका है। लिखित में शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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