मथुरा। जिले में गर्भवती महिलाओं में खून की कमी (एनीमिया) के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। महिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन बड़ी संख्या में महिलाएं जांच और उपचार के लिए पहुंच रही हैं। अधिकांश गर्भवती महिलाओं में हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य से कम पाया जा रहा है। जो मां और शिशु दोनों के स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
जिला महिला चिकित्सालय की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. कृष्णा शर्मा ने बताया कि ओपीडी में हाल के दिनों में एनीमिया से संबंधित शिकायतों में वृद्धि हुई है। समय पर जांच और उचित उपचार न मिलने पर प्रसव के दौरान जटिलताएं बढ़ सकती हैं। बताया कि गर्भावस्था के दौरान शरीर को अतिरिक्त आयरन और पोषण की आवश्यकता होती है लेकिन संतुलित आहार की कमी, अनियमित खान-पान और जागरूकता के अभाव के कारण महिलाएं खून की कमी की शिकार हो रही हैं।
गर्भवती महिलाओं को दवाओं के साथ-साथ हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, चना, गुड़, अनार, चुकंदर और आयरन युक्त आहार लेना चाहिए। साथ ही आयरन और फोलिक एसिड की गोलियां नियमित रूप से लेनी चाहिए। स्वास्थ्य विभाग ने आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच, समय पर टीकाकरण और पोषण संबंधी परामर्श देने के निर्देश दिए हैं। यदि समय रहते खान-पान में सुधार और नियमित जांच कराई जाए तो एनीमिया की समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।