संवेदनशीलता की दृष्टि से सबसे चुनौतीपूर्ण त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए प्रशासनिक तैयारियां अब तक व्यवस्थित नहीं हो सकी हैं। इसका अंदाजा मतदेय केन्द्र के निरीक्षण के समय 10 सेक्टर मजिस्ट्रेट की गैरमौजूदगी के साथ ड्राइवरों को मतदान अधिकारी प्रथम का दायित्व दिए जाने से सहज लगाया जा सकता है।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के प्रथम चरण में मतदान नौ अक्तूबर को होना है। इसके लिए अभी भी तैयारियों का तानाबाना तैयार किया जा रहा है। दो दिन पहले सेक्टर मजिस्ट्रेट तय हुए हैं। इन्हें बुधवार को छाता, चौमुंहा और नंदगांव ब्लाक के मतदान केन्द्रों का निरीक्षण करना था।
लेकिन 34 मजिस्ट्रेट में से 24 ने ही पहले दिन उपस्थित दर्ज कराई। आनन-फानन में 10 नए अफसरों को यह दायित्व सौंपा गया। सेक्टर मजिस्ट्रेट बने अफसरों को बुधवार को ही इस आशय का आदेश मिला और इसी के साथ उन्हें मतदान केन्द्रों की ओर दौड़ा दिया। इन अधिकारियों को सेक्टर मेजिस्ट्रेट की ट्रेनिंग भी नहीं मिली है। प्रशासनिक अव्यवस्था का आलम यही खत्म नहीं हो जाता है।
सरकारी ड्राइवरों को मतदान अधिकारी प्रथम बना दिया गया। बुधवार को उन्हें केडी डेंटल कालेज में संचालित प्रशिक्षण भी लेना था और सेक्टर मजिस्ट्रेटों के साथ गाड़ियां मतदान केन्द्रों के निरीक्षण के लिए भी ले जानी थीं। इस विषम स्थिति में ड्राइवरों ने खुद ही फैसला करते हुए प्रशिक्षण के लिए न जाकर सेक्टर मजिस्ट्रेटों के साथ ड्यूटी की।
छह को आएंगे पर्यवेक्षक
गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष विजय कुमार यादव को निर्वाचन आयोग ने मथुरा के लिए पर्यवेक्षक बनाया है। वह छह अक्तूबर को मथुरा आ रहे हैं। सिटी मजिस्ट्रेट ने इस आशय का आदेश आवश्यकता व्यवस्थाओं के लिए संबंधित अधिकारियों को जारी कर दिया है।