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Mathura News: जागरूकता से ही थमेगा एड्स का दानव

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मथुरा। एड्स की बीमारी के बारे में लोगों को अवगत कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार जागरूकता कार्यक्रम कर रहा है। पिछले सालों की तुलना में वर्ष 2025 में मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है। वर्ष 2016 में 142 मरीजों के सापेक्ष वर्ष 2025 में मरीजों की संख्या बढ़कर 262 पहुंच गई है।
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एड्स की बीमारी को लेकर स्वास्थ्य विभाग काफी गंभीर है। जिले के जिला अस्पताल, महिला अस्पताल, जिला संयुक्त चिकित्सालय वृंदावन और फरह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों का उपचार किया जा रहा है। यहां मरीजों को परामर्श देने के साथ ही जांच भी की जाती है। वर्ष 2024 में 18713 तथा वर्ष 2025 में 18967 मरीजों ने सेंटरों पर पहुंच कर परामर्श लिया और जांच कराई। हालांकि वर्ष 2024 में 281 मरीजों की पुष्टि हुई, जबकि वर्ष 2025 में मरीजों की संख्या घटकर 262 रह गई। स्वास्थ्य विभाग के दो साल के आंकड़े अधिकारियों को राहत प्रदान कर रहे हैं। साथ ही लोगों को एड्स से बचने के लिए जागरूकता, परीक्षण और उपचार कराने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
जिला अस्पताल में बने जिला एड्स नियंत्रण समिति सेंटर प्रभारी डॉ. सिद्धार्थ धनगर ने बताया कि मरीजों के उपचार पर तो ध्यान दिया जा रहा है। साथ ही नए मरीज न बढ़ें, इसके लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। जिन मरीजों को एड्स की पुष्टि होती है, उनका पूरा डाटा रखा जाता है। यदि कोई मरीज किसी माह दवा लेने के लिए नहीं आया तो उसे फोन करके पूछा जाता है। कई बार तो मरीज के घर पर दवा पहुंचाई जाती है। जिले में बने केंद्रों पर प्रतिदिन दर्जनों मरीज पहुंच रहे हैं और लंबे समय से उपचार ले रहे कई मरीजों की स्थिति में सुधार भी हुआ है।
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सीएमओ डॉ. राधावल्लभ ने कहा कि जिले में एड्स पीड़ितों की संख्या कभी कम तो कभी अधिक होने की स्थिति में बनी रहती है। जागरूकता अभियानों का निरंतर संचालन किया जा रहा है। बावजूद इसके समय-समय पर रोगियों की संख्या में उतार–चढ़ाव बना रहता है। उन्होंने बताया कि स्कूलों, कॉलेजों, ग्राम पंचायतों और शहरी क्षेत्रों में नियमित रूप से जागरूकता अभियान, रक्त जांच शिविर और काउंसलिंग कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। एड्स से जुड़े भ्रम और गलत धारणाओं को दूर करना बहुत जरूरी है, ताकि लोग समय रहते जांच कराएं और संक्रमित होने पर उपचार शुरू कर सकें। उन्होंने कहा कि जागरूकता ही एड्स जैसी गंभीर बीमारी से बचाव का सबसे बड़ा माध्यम है।



साल दर साल बढ़ी और घटी एड्स मरीजों की संख्या
वर्ष

पुरुष

महिला गर्भवती महिला
2018

118

65
8




2019

111

51

7
2020

94

37

11
2021

156

36

8
2022

148

40

15
2023

160

51

11
2024

200

69

12
2025

199

52

11


जिला कारागार में 43 बंदियों का चल रहा है एड्स का उपचार
- जिला अस्पताल के एआरटी सेंटर प्रभारी डॉ. सिद्धार्थ धनगर ने बताया कि जिला कारागार में एड्स पीड़ित मरीजों के संख्या 43 है। जेल प्रशासन के साथ एआरटी सेंटर इनकी लगातार देखरेख करता है। समय-समय पर इनका स्वास्थ्य परीक्षण और दवा देने के लिए टीम जिला कारागार जाती है।


महिलाओं की अपेक्षा पुरुष अधिक हो रहे एड्स का शिकार
- स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो साल दर साल महिलाओं की अपेक्षा पुरुष एड्स से अधिक पीड़ित हुए हैं। पुरुषों के मुकाबले एड्स से पीड़ित होने वाली महिलाओं की संख्या आधी से भी कम है। इसमें भी गर्भवती महिलाओं की संख्या बहुत कम है। इससे स्पष्ट होता है कि एड्स की बीमारी के प्रति पुरुषों के मुकाबले महिलाएं अधिक जागरूक हैं और सावधानी बरतती हैं।
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एड्स से बचाव के उपाय
- यौन संबंध बनाते समय हर बार नए कंडोम का प्रयोग करें।
- जीवनसाथी के अलावा किसी अन्य के साथ यौन संबंध न रखें।
- इंजेक्शन के लिए सुई, सिरिंजों या अन्य उपकरणों को हर बार नया लें।
- टैटू, छेदन और अन्य प्रक्रियाओं में उपयोग किए जाने वाले सभी उपकरण जांच करें।
- खून चढ़वाने से पहले उसकी एचआईवी जांच के बारे में जान लें।
- टूथब्रश और रेजर को साझा करने से बचें।
- यदि नियमित रूप से अलग-अलग लोगों के साथ यौन संबंध बनाते हैं तो एचआईवी की जांच कराते रहें।
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