बाबा हरदेव के निधन से निरंकारी भक्तों में शोक की लहर
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निरंकारी प्रमुख बाबा हरदेव सिंह की शुक्रवार को कनाडा में एक सड़क हादसे में मौत की खबर मिलने पर मथुरा में उनके हजारों अनुयायियों में शोक लहर दौड़ गई। जो जहां था बस एक दूसरे से फोन कर हकीकत जानने में जुटा रहा। लोग उनके रेलवे ग्राउंड पर किए आखिरी सत्संग को याद कर भावुक हो गए। इधर सोशल मीडिया पर निरंकारी मिशन के प्रतिनिधियों ने बाबा के निधन के बाद सुमिरन करने का संदेश अनुयायियों को देना शुरू कर दिया था।
बता दें कि निरंकारी प्रमुख का ब्रजभूमि से भावनात्मक लगाव था। यही वजह रही कि वे यहां बार-बार आकर भक्तों को आध्यात्मिक पूंजी से मालामाल करते थे। निरंकारी मिशन की सन 1929 में पेशावर में स्थापना हुई। भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के साथ ही 1948 में मथुरा में इस मिशन की नीवं माताराम कौर ने रखी। माताराम मिशन के प्रथम गुरु बाबा बूटा सिंह की शिष्या थीं। यही वजह रही कि निरंकारी मिशन के चौथे गुरु बाबा हरदेव ब्रज में लगातार आते और माताराम कौर के पोते और मथुरा मिशन के संयोजक हरविंद्र कुमार के आवास पर रुकते थे।
बाबा अंतिम बार नौ दिसंबर 2014 को रेलवे ग्राउंड पर आए और दो दिवसीय सत्संग में अपने हजारों अनुयायियों पर आध्यात्मक ज्ञान की वर्षा की। इससे पहले वर्ष 2012 में बाबा ने ही मथुरा के भक्तों को निरंकारी सत्संग भवन की सौगात दी थी। उनके निधन की सूचना के बाद मिशन संयोजक हरविंद्र कुमार, अशोक अरोड़ा, सुंदर लाल, चंदनलाल आडवाणी, रामचंद खत्री, किशोर स्वर्ण, मोहन चंदानी, मोहन सिंह, लक्ष्मी आदि सत्संग भवन में मौजूद थे।