उत्तर प्रदेश भू-राजस्व संहिता-2006 संशोधन अध्यादेश (उत्तर प्रदेश भू-राजस्व संहिता-2015) को राज्यपाल की स्वीकृति मिल गई है। प्रदेश के अपर महाधिवक्ता राजबहादुर सिंह यादव ने बताया कि इस पर लोगों से सुझाव मांगने के लिए राजस्व अधिकारियों के साथ बीते दिन कलक्ट्रेट सभाकक्ष में बैठक की गई।
बैठक में अपर महाधिवक्ता ने बताया कि राजस्व अधिकारियों में से ही तहसीलदार न्यायिक, उप जिलाधिकारी न्यायिक, अपर जिलाधिकारी न्यायिक और अपर आयुक्त न्यायिक की तैनाती का प्रावधान अध्यादेश में है। इससे वादों का शीघ्रता से निस्तारण हो सकेगा। खतौनी में सहखातेदारों का हिस्सा लिखा जाएगा और हिस्से को नक्शे में भी दर्शाया जाएगा। 50000 रुपये तक के बकाएदार की गिरफ्तारी नहीं होगी। गांव में दाखिल-खारिज और छोटे झगड़े आपसी सुलह समझौते के आधार पर निपटाने के लिए ग्रामीण राजस्व समिति का गठन किया गया है।
उन्होंने बताया कि खेतों की सीमा विवादों के लिए अब कानूनगो की रिपोर्ट की आवश्यकता नहीं होगी। निर्धारित शुल्क जमा करके उप जिलाधिकारी सीधे पैमाइश के आदेश देंगे। भू-अभिलेखों का डिजिटलाइजेशन कर पैमाइश की प्रक्रिया सरल की गई है। सार्वजनिक उपयोग के लिए भूमि के स्थानांतरण के लिए राज्य सरकार को सशक्त बनाया है जिससे बड़ी परियोजनाएं न रुकें। अपर महाधिवक्ता ने जानकारी दी कि प्रदेश में राजस्व से संबंधित अनुपयोगी 39 एक्ट को समाप्त कर दिया गया है।
बैठक में उप भूमि व्यवस्था आयुक्त राजस्व परिषद लखनऊ भीष्मलाल वर्मा, अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) अजय कुमार अवस्थी, नगर मजिस्ट्रेट विजय कुमार, उप जिलाधिकारी गोवर्धन विश्वभूषण मिश्रा और छाता रामअरज यादव, तहसीलदार महावन देवेन्द्र पाल सिंह यादव सहित सभी तहसीलदार, शासकीय अधिवक्ता सिविल बद्रीप्रसाद सिंह, जिला शासकीय अधिवक्ता चन्द्र मोहन अग्रवाल, अपर शासकीय अधिवक्ता राजस्व सुनील शर्मा सहित अन्य अधिवक्ता उपस्थित थे।