परीक्षित कौशिक
गोवर्धन (मथुरा)। चार जुलाई से मथुरा के गोर्वधन में शुरू होने जा रहे करोड़ी मेले में इस बार एक करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। बांकेबिहारी कॉरिडोर के बनने की आहट के बाद मथुरा में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है। ऐसे में मेले की तैयारियां जोरशोर से चल रही हैं। कारोबारियों को आस है कि इस बार मेले में कम से काम 300 करोड़ का कारोबार होगा। यही कारण है कि दूसरे राज्यों से भी लगातार सामग्री इकट्ठा की जा रही है।
सरकारी दस्तावेजों में तो मेला चार जुलाई से शुरू होकर 11 जुलाई तक यानी आठ दिन चलेगा लेकिन मेले में सबसे ज्यादा भीड़ एकादशी से पूर्णिमा तक पांच दिन रहती है। सरकारी एवं निजी कारोबारियों का अनुमान है कि इस बार मेले में एक करोड़ से ज्यादा लोग आने वाले हैं। कारण है कि बांकेबिहारी कॉरिडोर की आहट शुरू होने के बाद से ही मथुरा में लोगों का आवागमन ज्यादा हो गया है। पिछले वर्ष मुड़िया मेले में एक करोड़ लोग शामिल हुए थे। इस बार यह संख्या बढ़ सकती है। यही कारण है कि वृहद स्तर पर व्यवस्थाएं की जा रही हैं। मंडल आयुक्त से लेकर एडीजी, डीएम, डीआईजी, एसएसपी लगातार मेला क्षेत्र में तैयारियों को परख रहे हैं।
प्रत्येक व्यक्ति करता है खर्च
व्यापार मंडल गोवर्धन के अध्यक्ष गणेश पहलवान कहते हैं कि वैसे तो इस मेले में हर व्यक्ति खुलकर खर्च करता है पर यदि प्रति व्यक्ति तीन सौ रुपये खर्च का औसत भी लगाएं तो भी 300 करोड़ से ज्यादा का कारोबार मेले में होने की उम्मीद है। सबसे ज्यादा खर्च मिठाई, कंठी-माला, ठाकुरजी की पोशाक, भोग, प्रसाद पर होता है। दुकानदार भी इस बार खासे उत्साहित हैं।
राजस्थान तक से आ रहे पेड़े
मेले में सबसे ज्यादा बिक्री पेड़ों की होती है। व्यापारियों का कहना है कि चिड़वा-चिनौरी राजस्थान के कई शहरों से मंगाए गए हैं, जबकि पेड़ा व अन्य मिठाइयां का भी स्टाॅक धीरे-धीरे अन्य शहरों से हो रहा है। गिरिराजजी की परिक्रमा में कस्बा गोवर्धन से लेकर जतीपुरा, राधाकुंड में भोग-प्रसाद की दुकानों की संख्या हजारों में हैं।
बोले व्यापारी
पिछली गुरु पूर्णिमा पर कम बिक्री हुई थी, लेकिन इस बार ज्यादा बिक्री की उम्मीद है। मुड़िया मेले में गुरुपूजा के लिए प्रसाद रूपी मिठाइयां सबसे ज्यादा बिकती है। इस लिए पहले से मावा व अन्य पदार्थों का पहले मंगाकर स्टॉक कर लिया है।
संजय अग्रवाल, गोवर्धन मिष्ठान भंडार
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गिरिराज जी को भोग अर्पित करके भक्त प्रसाद को घर ले जाते हैं। परंपरा होने के कारण परिक्रमा करने के बाद प्रसाद जरूर ले जाते हैं। इसलिए प्रसाद का पूरा स्टाॅक किया है। इसमें पेड़ा व मावा बनीं हुई अन्य मिठाइयां मिशाल हैं।
केशव सैनी, गिर्राज मिष्ठान भंडार
मुड़िया मेला पर टीमें नियमित चेकिंग कर रहीं हैं। साथ ही दुकानदारों को समझाया भी जा रहा है कि यह उत्तर भारत का विशाल मेला है। इसलिए गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाए। बाहर से आपूर्ति करने वाले व्यापारियों पर भी भी पैनी बनी हुई। अगर किसी प्रकार कहीं लापरवाही मिलेगी तो कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। -
धीरेंद्र प्रताप सिंह, सहायक आयुक्त (खाद्य), खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन