जयगुरुदेव आश्रम में चल रहे वार्षिक भंडारा सत्संग के दौरान आश्रम परिसर में बैठे भक्त।
मथुरा। जयगुरुदेव आश्रम में चल रहे वार्षिक भंडारे, सत्संग व मेले के चौथे दिन श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। उपदेशक सतीश चंद्र और राजेश ने सत्संग के माध्यम से श्रद्धालुओं को शाकाहार, सदाचार, अहिंसा और मानवता का संदेश दिया।
राष्ट्रीय उपदेशक राजेश ने पुण्य पुंज बिन मिले न संता, पंक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि संतों और महात्माओं का सानिध्य मनुष्य को तभी प्राप्त होता है जब उसके पुण्य जागृत होते हैं। उन्होंने कहा कि महात्मा सत्संग के माध्यम से जीवों को सही मार्ग दिखाने और उन्हें चेताने का कार्य करते हैं। यदि मनुष्य समय रहते संतों की शिक्षाओं को नहीं समझता तो उसका बहुमूल्य मानव जीवन व्यर्थ चला जाता है।
उन्होंने कहा कि बाहरी आंखों से महापुरुषों की पहचान नहीं की जा सकती। इतिहास में कई संतों और महात्माओं को लोगों ने समझने में भूल की लेकिन जिन्होंने समय पर उनकी वाणी को स्वीकार किया, उनका लोक और परलोक दोनों सुधर गया। उन्होंने कहा कि संत किसी जाति, पंथ या मजहब का भेदभाव नहीं करते बल्कि सभी जीवों के कल्याण के लिए कार्य करते हैं। राजेश ने कहा कि पंकज महाराज लगातार शाकाहार और सदाचार के प्रचार में लगे हुए हैं। उन्होंने निंदा को बड़ा पाप बताते हुए कहा कि महात्माओं ने सदैव प्रेम, सेवा और सद्भाव का संदेश दिया है।
राष्ट्रीय उपदेशक सतीश चंद्र ने कहा कि धर्म का मूल आधार सत्य, अहिंसा और परोपकार है। उन्होंने कहा कि धर्म कभी हिंसा और मांसाहार का समर्थन नहीं करता। वर्तमान में दुनिया में अनेक मत और पंथ हैं, जिससे लोग भ्रमित हो रहे हैं। ऐसे समय में संतों के बताए मार्ग पर चलना ही मानवता की रक्षा का मार्ग है। उन्होंने बाबा जयगुरुदेव की भविष्यवाणियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी कही बातें आज सत्य साबित हो रही हैं। सत्संग के दौरान आश्रम परिसर में जगह-जगह भंडारे और मीठे शरबत की प्याऊ लगाई गईं।