वृंदावन (मथुरा)। याके रस के भरे हैं कपोल, जय जय राधारमण हरिबोल, करे कालिंदी कूल किलोल.., जय जय राधारमण हरिबोल, प्यारी पियहीं सिखावत वीणा, आन बंधान कल्याण मनोहर... आज इन दोऊन पै बलिजइयो... रोम रोम सौं छवि बरसत हैं......जादू भरे दो नयन लाल तेरे.... अति बांके सुंदर मतवारे.. अधियारे छवि नयन लाल तेरे... जादू भरे दो नयन लाल तेरे.... श्रीराधारमण हमारे मीत....आदि पदावलियों को गायन कर भागवत प्रवक्ता इंद्रेश उपाध्याय ने सायंकालीन राग सेवा की।
उन्होंने ठाकुर जी एवं प्रियाजी में शृंगार की श्रेष्ठता का वर्णन अष्टछाप के कवि नंददास जी वाली लीला के पदों को भी सुमधुर कंठ से गायन किया। गायन वादन के मध्य श्रोता एवं श्रद्धालु आत्मविभोर हो गए। पूरा राधारमण प्रांगण भक्तिरस में डूब गया। सेवा महोत्सव के अंतर्गत केले के तनों से बनी खपरैली शैली में कुटीर निकुंज में विराजित होकर ठाकुर राधारमण लाल ने पीले रंग की पोशाक एवं रत्नजड़ित आभूषण धारण कर भक्तों को दर्शन दिए। अपलक नेत्रों से भक्त अपने प्रभु का दीदार कर रहे थे।
कुटीर निकुंज में बनी केले के तनों से छोटी-छोटी खपरैल प्राचीन शैली का दर्शन करा रही थीं एवं भक्तों को भी आकर्षित कर रही थी। आध्यात्मिक गुरु आचार्य श्रीवत्स गोस्वामी ने बताया कि एककोटि देवगण रूप में स्थित एकादश रुद्र कहे जाने वाले कपाली रुद्र द्वारा भावस्वरूप ठाकुर राधारमण लाल की निकुंज सेवा की गई है। आचार्य वेणुगोपाल गोस्वामी, अभिनव गोस्वामी एवं सुवर्ण गोस्वामी आदि उपस्थित थे।