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मथुरा: ठाकुरजी को भी लगने लगी है सर्दी

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ठाकुर राधाबल्लभ की आगे सेवायत द्वारा रखी गई चांदी की सिगड़ी। - फोटो : VRINDAVAN
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वृंदावन (मथुरा)। कहते हैैं कि भगवान भाव और भक्ति के भूखे होते हैं। भक्त अपने आराध्य को अपनी भावना से ही रिझा सकता है। ऐसी ही भावना हमारे ठाकुरजी के विग्रहों के प्राकटॺकर्ता आचार्यों ने की थी। उसी भक्तिपूर्ण आत्मीय भाव से ओतप्रोत हो ठाकुरजी के श्रीविग्रहों की विधि पूर्वक सेवा पूजा हो रही है।
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कड़कड़ाती सर्दी में जब लोग अपने बचाव को गर्म कपड़े, रजाई-गद्दे और अलाव-हीटर आदि का प्रयोग करते हैैं। ठीक इसी प्रकार ऋतु परिवर्तन होते ही आराध्य ठाकुरजी के श्रीविग्रहों की भी सेवापूजा पद्घति में बदलाव हो जाता है।
मंदिरों के दर्शन-पूजन के कार्यक्रम में परिवर्तन के अलावा ऋतुसंगत व्यंजन एवं प्रसाद भी प्रभु की सेवा में अर्पित किया जा रहा है। दिसंबर की ठंड में ठाकुरजी के सामने सिगड़ी रखी जाती है, जिससे ठंड के प्रभाव को कम किया जा सके। इसके साथ ही ठाकुरजी का शयन भी रजाई-गद्दों पर होता है, साथ ही गर्माहट देने वाले पदार्थ ठाकुुरजी को निवेदित किए जाते हैं।
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शुक्रवार को प्रसिद्ध ठाकुर राधाबल्लभ लाल के सामने चांदी की सिगड़ी (अंगीठी) में जलती हुई लकड़ियां रखी र्गइं। जिससे कि प्रभु को गर्माहट मिल सके। सेवायत विशाललाल गोस्वामी ने बताया कि यह क्रम पौष से माघ मास तक चलता है।
इन मदिरों में सिगड़ी तापते हैं ठाकुरजी
सेवाकुंज मंदिर, राधारमण मंदिर, राधा दामोदर, श्याम सुंदर, यशोदानंद, गोपीनाथ मंदिर, गोकुलानंद एवं राधिका प्रियावल्लभ मंदिर में ठाकुरजी को सिगड़ी (अंगीठी) पर तापते हुुए दर्शन किए जा सकते हैं।
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