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मथुरा: मूक- बधिर, मानसिक कमजोर बच्चों के हाथों से बने दीपकों से रोशनी

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मथुरा। सैकड़ों घरों में इस बार मूक-बधिर बच्चों के हाथों से बने मोम के दीपक जलाकर लोग दिवाली का त्योहार मनाएंगे। मूक-बधिर बच्चों ने अपनी लगन और मेहनत से ये दीपक बनाकर सुंदर टोकरियों में सजाया है। यह कार्य कल्याणं करोति परिसर में स्थित संबल विद्यालय के मनोचिकित्सकों द्वारा प्रेरित करने पर बालकों ने किया है।
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यहां 50 श्रवण बाधित बच्चे हैं, जबकि मानसिक रूप से अस्वस्थ बच्चे 60 हैं। वहीं, दृष्टि बाधित बच्चों की संख्या 14 है। स्पेशल एज्युकेटरों के माध्यम से इन बच्चों का उपचार किया जाता है। इस बार लग रहे दीवाली मेलों में इन दीयों का स्टॉल भी लगाए गए। जहां लोग इन दीपकों को खरीद भी रहे हैं। संबल विद्यालय के प्राचार्य अमरनाथ चतुर्वेदी ने बताया इन बच्चों ने अब तक 4 से 5 हजार दीपक तैयार किए हैं।
ये बच्चे रक्षाबंधन पर राखी, जन्माष्टमी पर माला, ग्रीटिंग कार्ड लिफाफा आदि भी तैयार करते हैं। उन्होंने बताया कि विद्यालय में स्पेशल एज्युकेटर के रूप में अभिषेक यादव, कृष्ण पाल सिंह व सांकेतिक भाषा अनुवादिका शिवानी सिंह सेवाएं दे रहे हैं। इनके कारण ही यह बच्चे सांकेतिक भाषा व अन्य प्रकार की शिक्षा ले पा रहे हैं।
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मूक-बधिर बच्चों का व्हाट्सएप ग्रुप भी संचालित
मूक-बधिर व मानसिक रूप से अस्वस्थ बच्चों ने अपना ग्रुप भी बनाया है। व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से चार हजार से अधिक बच्चे एक-दूसरे के साथ आपस में मैसेज करना, वीडियो कॉल करना व सांकेतिक भाषा के माध्यम का उपयोग करते हुए एक दूसरे के साथ अपनी भावनाओं का आदान प्रदान करते हैं। ये श्रवण बाधित, बौद्धिक अक्षमता वाले बच्चों का सबसे बड़ा ग्रुप है।
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