वृंदावन निधिवन में भजन गाता कलाकार।
- फोटो : VRINDAVAN
वृंदावन (मथुरा)। ठाकुर श्रीबांकेबिहारी महाराज की प्राकट्य और स्वामी हरिदास महाराज की साधना स्थली निधिवन राज मंदिर में बुधवार को भक्ति की रसधारा बही। ब्रज रसिक संत हितश्री आसुदास महाराज की स्मृति पर आयोजित निधिवन रसोत्सव में ब्रज रसिक सूफी गायक जेएसआर मधुकर ने अपने चिर परिचित अंदाज में सूफी गायन कर निधिवन राज की कुंजों को स्वरमयी बना दिया।
भजनों को सुन रसिक जन मस्ती में नाचने लगे। सूफी गायक मधुकर ने कान्हा मेरी गलियों में आया न करो, मीठी-मीठी बांसुरी बजाया न करो...भजन से कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने लगन लागी तुमसे मन की लगन सुनाया तो भक्त नाचने लगे। मैं तो पिया सो नेन लगाए आई, रे मोरा पिया घर आया जी, मंगल गांवो चौक पुरावो भजन की प्रस्तुति दी।
इसके बाद उन्होंने श्यामा प्यारी कुंज बिहारी जय जय श्री हरिदास दुलारी, अधरम, मधुरम, वदनम, मधुरम, मधुराधिपति अखिलम मधुरम सुनाया। देर शाम तक भक्त भजनों पर झूमते रहे। सह गायिका भावना सखी, शशि सखी एवं सह गायक लक्ष्य मधुकर, मयंक मधुकर ने साथ दिया। निधिवन राज मंदिर के सेवा अधिकारी भीख चंद्र गोस्वामी, नवेली शरण बाबा, किशोरी शरण बाबा, कुंज बिहारी दास बाबा, इंदु भूषण, स्वामी नागरी दास बाबा, राधा चरण दास बाबा आदि संतों के सानिध्य में देर शाम तक भजनों की स्वर लहरी में भक्त गोते लगाते रहे।