राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के लिए मथुरा और मुजफ्फर नगर प्रबल दावेदार के रूप में सामने आए हैं। प्रमुख सचिव आवास के समक्ष लखनऊ में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के करीब आधा दर्जन शहरों ने एनसीआर के लिए अपने दावे प्रस्तुत किए।
शुक्रवार को लखनऊ में प्रमुख सचिव सदाकांत की अध्यक्षता में एनसीआर के विस्तार को लेकर अहम बैठक हुई। इसमें रेजीडेंट कमिश्नर दिल्ली सहित मथुरा से विप्रा के उपाध्यक्ष नगेन्द्र प्रताप, अलीगढ़ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष श्रीराम के साथ मुजफ्फर नगर, हाथरस और अन्य जनपदों के जिलाधिकारियों ने भी भाग लिया।
इसमें मथुरा को एनसीआर में शामिल करने का दावा प्रस्तुत करते हुए विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष नगेन्द्र प्रताप ने कहा कि धार्मिक नगरी मथुरा से ताज नगरी आगरा के बीच की दूरी बहुत कम है। ऐसे में दिल्ली से देश-विदेश के पर्यटकों का आगमन ताज के लिए मथुरा के रास्ते ही होता है। ऐसे में मथुरा का डेवलपमेंट भी एनसीआर के मापदंडों के तहत होना चाहिए।
साथ ही यह धार्मिक शहर दिल्ली-आगरा नेशनल हाईवे-टू और यमुना एक्सप्रेसवे पर स्थित है। इन दोनों ही मार्गों की उपलब्धता के चलते अब दिल्ली और मथुरा की दूरी बहुत कम समय में ही तय हो जाती है। इसके अलावा मथुरा से अधिक दूरी पर स्थित भरतपुर को एनसीआर में शामिल किया जा चुका है। दिल्ली के सबसे निकट हेरिटेज सिटी के रूप में भी मथुरा स्थित है।
इसी तरह मुजफ्फर नगर के डीएम ने भी अपने नगर को एनसीआर में शामिल करने के पक्ष में मजबूत दावा रखा। अलीगढ़, हाथरस सहित अन्य जनपदों ने भी एनसीआर में शामिल करने की आवश्यकता जताई है।
टल गई रोप-वे की बैठक
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गुरुवार को लखनऊ में होने वाली पर्यटन विकास संबंधी बैठक गुरुवार को टल गई। इसमें मथुरा में बरसाना, विध्यांचल और चित्रकूट में बनने वाले रोप-वे के संदर्भ में भी विचार होना था।