मथुरा। कोरोना महामारी के समयकाल में लॉकडाउन के चलते शिक्षण संस्थान भी बंद रहे थे। इस दौरान ऑनलाइन पढ़ाई कराई गई। अब स्कूल संचालक अभिभावकों पर फीस देने का दबाव बना रहे हैं। मथुरा के एक स्कूल ने नौवीं के 11 छात्रों को फीस न देने की सजा तक मुकर्रर कर दी। छात्रों को पहले ही दिन परीक्षा तक देने से वंचित कर दिया गया। विद्यालय की इस कार्रवाई के बाद जिम्मेदार अफसर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं, जबकि छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ गया है। मामला दाऊदयाल एडवोकेट सरस्वती विद्या मंदिर सलेमपुर का बताया जा रहा है।
मंगलवार को विद्यालय में कक्षा नौ के छात्रों की अंग्रेजी की पहली परीक्षा थी। सुबह समय से छात्र स्कूल पहुंचे, लेकिन 11 छात्रों को विद्यालय में इसलिए प्रवेश नहीं करने दिया गया कि उनके अभिभावक कोरोनाकाल समय की स्कूल फीस जमा नहीं कर सके। अध्यापकों ने कहा कि बिना कोरोना काल की फीस जमा किए वे परीक्षा में नहीं बैठ सकेंगे। इन सभी छात्रों को परीक्षाकाल के बाद स्कूल प्रबंधतंत्र द्वारा छोड़ा गया। घर आकर जब छात्रों ने अपनी आपबीती परिवार को बताई। वार्ड संख्या 3 गिरधरपुर निवासी समाजसेवक डॉ. नेत्रपाल शास्त्री ने जिला विद्यालय निरीक्षक को पत्र लिखकर शिकायत की है। वहीं, अभिभावक कल्याण संघ के संस्थापक छात्र शशिभानु गर्ग ने कहा कि हम उन सभी अभिभावकों के साथ खड़े हैं।
हमारे स्कूल में ऐसा कोई मामला नहीं हुआ है। छात्र अनुपस्थित रहे होंगे इसीलिए उनकी परीक्षा छूटी है। हमने किसी भी छात्र पर फीस जाम करने के लिए दबाव नहीं बनाया है।
- प्रशांत तिवारी, प्रधानाचार्य बाबू दाऊदयाल एडवोकेट सरस्वती विद्या मंदिर
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सीबीएससी बोर्ड हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। अगर किसी भी अभिभावक को इन विद्यालय प्रबंधन से समस्या है तो वह सीबीएसई बोर्ड के रीजनल ऑफिसर से शिकायत कर सकता है। हम इसमें कुछ नहीं कर सकते।
डॉ. राजेंद्र सिंह, डीआईओएस।