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सज गए मंदिर, मनेगा उत्सव: मथुरा में दाऊजी के जन्मोत्सव को लेकर धूम, षष्ठी को स्वाति नक्षत्र में होंगे अवतरित

Wed, 20 Sep 2023 05:36 PM IST
भूपेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा

सार

मथुरा के बलदेव नगर में सज गए मंदिर, उत्सव मनाया जाएगा। यहां दाऊजी के जन्मोत्सव को लेकर धूम है। षष्ठी को स्वाति नक्षत्र में वह अवतरित होंगे।
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Mathura News: दाऊजी महाराज एवं रेवती मैया की मनोहारी झांकी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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तीर्थनगरी मथुरा के बलदेव नगर में बुधवार से ही चंहुओर खुशी का माहौल है। यह माहौल गुरुवार को श्रीदाऊजी महाराज के जन्मोत्सव के उत्सव को लेकर है। 21 सितंबर को बलदेव जन्मोत्सव मनाया जाएगा। दर्शनार्थी विशेष हर्षोल्लास व श्रद्वा भक्ति से ओतप्रोत उस क्षण का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। नंद के आनंद भयो, जय दाऊ दयाल की...मंदिरों में गूंजने वाला है। इसका इंतजार समस्त ब्रजवासी बेसब्री से कर रहे हैं।

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भगवान के 19वें अवतारों में यदुवंश में बलराम जी का प्राकट्य हुआ। इन्होंने दुष्टों का संहार किया और पृथ्वी का भार उतारा। गर्ग संहिता के बलदेव खंड में शेषावतार श्री बलदेव के जन्म की कथा रोचक है। देवकी के सातवें गर्भ में भगवान अनंत का आगमन हुआ। वसुदेव की दूसरी पत्नी रोहिणी कंस के भय से गोकुल में रहती थी।

योगमाया ने भगवान को देवकी के उदर से खींचकर रोहिणी के गर्भ में स्थापित किया। पांच दिन बाद भाद्रपद मास शुक्ल पक्ष षष्ठी को स्वाति नक्षत्र, गुरुवार, मध्याह्न, तुला लग्र, पांच ग्रह उच्च स्थित थे। उस समय रोहिणी के गर्भ से शेषावतार बलदेव जी का अवतरण हुआ। मेघों ने जल बरसाये, देवताओं ने पुष्प वर्षा की। 

बलदेव जी की प्रतिमा का प्राचीन इतिहास 

श्री बलराम जी की प्रतिमा श्री कृष्ण के पौत्र श्री ब्रजनाभ ने पूर्वजों की पुण्य स्मृति में स्थापित की थी। बलदेव जी का यह विग्रह द्वापर के बाद भूमिस्थ था। बलदेव नगर में स्थापित मूर्ति पूर्वकुषाण कालीन है। निर्माण काल तीन सहस्त्र से अधिक है। कहा जाता है कि गोकुल में श्री मद्बल्लभाचार्य महाप्रभु के पौत्र गोस्वामी गोकुलनाथ जी को बलदेव जी ने स्वप्र दिया। 

कहा कि श्यामा गाय जिस स्थान पर दूध स्त्रवित करती है। भूमि में उनकी प्रतिमा दबी है। भूमि की खुदाई की गई तो श्री विग्रह को मिला। यह विग्रह श्री कल्याण देवजी को पूजा-अर्चना के लिए सौंप दिया गया। इसके बाद मंदिर का निर्माण किया गया। तब से कल्याण देव जी के वंशज पूजा कर रहे हैं।  

मथुरा जिला मुख्यालय से पूर्वी छोर पर 20 किमी दूर बलरामजी का विशाल विग्रह स्थित है। जो आठ फीट ऊंचा, साढ़े तीन फुट चौड़ा है। श्याम वर्ण है। पीछे शेषनाग छाया करते हैं। विग्रह नृत्य मुद्रा में है। दाहिना हाथ सिर से ऊपर वरद मुद्रा में है। बाएं हाथ में चषक है। विशाल नेत्र, भुजाएं, भुजाओं में आभूषण, कलाई में कडूला उत्कीर्णित है। पैरों में आभूषण, कटि प्रदेश में धोती पहने हैं। मूर्ति के कान में कुंडल, कंठ में बैजंती माला उत्कीर्ण है। मूर्ति के सिर के ऊपर के तीन बलय हैं, जो विग्रह की शोभा को बढ़ा रहे हैं। 
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रामावतार में छोटे, कृष्णावतार में बने बड़े भ्राता

माना जाता है कि बलराम जी शेषावतार हैं। रामावतार में वह लघु भ्राता लक्ष्मण के रूप में अवतरित हुए हैं। वहीं श्रीकृष्णावतार में ज्येष्ठ भ्राता बलदेव के रूप में अवतरित हुए हैं। दाऊजी को प्रतिदिन भोग प्रसाद में माखन-मिश्री, खीर-पूरी, भांग, दूध, पेड़ा लगाया जाता है। मथुरा के बलदेव में एक विशाल क्षीर सागर बनाया गया है। इसके चारों ओर पक्के घाट हैं। यहां दर्शनार्थी स्नान, आचमन कर पुण्य लाभ कमाते हैं।
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