खानपान के सामान में मिलावट और जंक फूड का बढ़ता प्रचलन नई पीढ़ी को फैटी लिवर का शिकार बना रहा है। कोढ़ में खाज बिगड़ी दिनचर्या बनी है। इन रोगियों की संख्या में तेजी के साथ इजाफा हो रहा है। एक आंकड़े के मुताबिक ओपीडी में हर दस मरीज में से छह इसके शिकार आ रहे हैं।
महर्षि दयानंद अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डा. मुकंद बंसल ने बताया कि शरीर में लिवर एक लेबोरेट्री की तरह काम करता है। जब कभी इंसान दूषित खाने या पीने के सामान का इस्तेमाल करता है इसका सबसे बुरा असर उसके लिवर पर ही पड़ता है।
इससे संबंधित बीमारियों को कंट्रोल करने के लिए टीकाकरण भी किया जाता है। निजी चिकित्सक डा. आशीष गोपाल ने बताया नई पीढ़ी में जंक फूड का बढ़ता प्रचलन और दिनचर्या में सुबह कसरत का न होना नई पीढ़ी को फैटी लिवर का शिकार बना रहा है। इसके अलावा संक्रमण से भी ये रोग तेजी के साथ फैल रहा है।
ऐसे बच सकते हैं
- जंक फूड, तली वस्तुओं का सेवन कम से कम करें।
- शराब या अन्य नशीले पदार्थ का सेवन कतई न करें।
- खाने में सलाद और गुणवत्ता पूर्ण खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल करें।
- अस्पताल में नई सिरिंज से ही इंजेक्शन लगवाएं।
- रक्त ऐसी लैब से लें जहां खून की पूरी जांच की जाती हो।
लिवर से संबंधित बीमारियों का बेहतर उपचार बचाव है। हमें अपने खानपान की वस्तुओं की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए सेवन करना चाहिए। नवजात को इसके टीके लगवाने चाहिए जो सरकारी अस्पतालों में मुफ्त लगाए जा रहे हैं।
- डा. केपी गर्ग, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक महर्षि दयानंद अस्पताल मथुरा।
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नई पीढ़ी फैटी लिवर की तेजी के साथ शिकार हो रही है। ओपीडी में ये आंकड़ा हर दस मरीज में छह का है। दिनचर्या में कसरत, शारीरिक परिश्रम को भी शामिल करना आवश्यक है।
- डा. आशीष गोपाल, मथुरा