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Mathura News: निलंबन की कार्रवाई के बाद विभाग में खामोशी का पहरा

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कार्रवाई के बाद राज्य कर कार्यालय में खाली पड़ीं अ_धिकारियों की कुर्सी।
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मथुरा। राज्य कर विभाग में एक साथ सात अधिकारियों पर निलंबन की कार्रवाई ने बुधवार को पूरे दफ्तर का माहौल बदल दिया। सुबह से ही दफ्तर में कामकाज ठप जैसा माहौल रहा। कई अधिकारी अपनी कुर्सियों से नदारद दिखे और जो मौजूद थे, वह भी एक-दूसरे से नजरें चुराते नजर आए। चाय-गपशप और हलचल की जगह दिनभर कानाफूसी का दौर चलता रहा।
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कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों और अधिकारियों के चेहरों पर हैरानी और चिंता, दोनों झलक रही थीं। कई कमरों के दरवाजे बंद रहे, तो कहीं खाली कुर्सियां ही नजर आईं। केवल स्टेनो और बाबू औपचारिक फाइलों पर काम करते दिखे, लेकिन सामान्य दिनों जैसा रौनकदार माहौल यहां भी नहीं रहा। दोपहर तक निलंबन आदेश की प्रतियां पहुंचीं और संबंधित अधिकारियों को तामील कराई गईं, जिसके बाद चर्चाओं का दौर और तेज हो गया। अधिकारियों ने बताया कि मार्च में लखनऊ से तबादला होकर आईं एक महिला अधिकारी ने 27 जुलाई को प्रमुख सचिव को उपायुक्त कमलेश कुमार पांडेय के अनैतिक व्यवहार और उत्पीड़न की शिकायत की थी। इसके बाद 28 जुलाई को यह शिकायत मथुरा कार्यालय तक पहुंची और उसी रात आठ बजे तक आंतरिक परिवाद समिति (विशाखा) का गठन कर दिया गया। 29 जुलाई को सुबह 11 बजे जांच शुरू हुई, लेकिन उसी दिन शाम चार बजे तक ऊपर से रिपोर्ट मांगी गई।
कमलेश कुमार ने मौखिक बयान दर्ज कराते हुए लिखित पक्ष रखने के लिए 30 जुलाई की शाम पांच बजे तक का समय मांगा, मगर समिति ने केवल 12 बजे तक का समय दिया। दोपहर तक जवाब मिलने के बाद उसी दिन रिपोर्ट तैयार कर ग्रेड-1 आयुक्त अलीगढ़ के माध्यम से शासन को भेज दी गई। इसके बाद मंगलवार देर रात शासन ने उपायुक्त कमलेश कुमार पांडेय के साथ सहायक आयुक्त कोमल छाबड़ा, विशाखा समिति की अध्यक्ष एवं उपायुक्त प्रतिभा, सहायक आयुक्त पूजा गौतम, उपायुक्त संजीव कुमार, राज्य कर अधिकारी सीता देवी और उपायुक्त वीरेंद्र कुमार को निलंबित कर दिया। प्रमुख सचिव की इस कार्रवाई की भनक राज्य कर विभाग के अधिकारियों को लगी तो कार्यालय में खामोशी छा गई। कई अफसरों ने तो कामकाज से ही दूरी बना ली।
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जांच पर खड़े किए सवाल
निलंबन की कार्रवाई से जांच प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हुए हैं। अधिकारियों का आरोप है कि शिकायत मिलने के महज दो दिन के भीतर रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेज दी गई, जबकि सामान्यत: ऐसी जांचों में दोनों पक्षों को पर्याप्त समय दिया जाता है।

इतनी जल्दबाजी में की गई कार्रवाई से निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। यदि समिति की रिपोर्ट गलत थी तो उसके लिए अलग से जांच होनी चाहिए थी। उन्होंने सुझाव दिया कि मामले की पारदर्शी जांच के लिए नई समिति का गठन किया जाए, ताकि दोनों पक्षों को बराबरी का अवसर मिल सके और निष्पक्ष जांच हो सके।
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विपिन कुमार अग्रवाल, अध्यक्ष,
टैक्स बार एसोसिएशन
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