मथुरा। विवाहिता को जिंदा जलाने के मामले में पांच ससुरालीजनों को जिला जज आशीष गर्ग की अदालत ने मंगलवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। महिला के मृत्यु पूर्व बयान को निर्णय का आधार माना गया।
जिला शासकीय अधिवक्ता शिवराम सिंह तरकर ने बताया कि ग्राम बरौली बलदेव निवासी रामवीर ने अपनी बेटी ममता उर्फ ममतेश की शादी वर्ष 2006 में राया के ग्राम अनौड़ा निवासी प्रवीन के साथ की थी। शादी के करीब 14 वर्ष बाद 2 जुलाई 2020 की शाम को करीब 5 बजे ममता को ससुराल वालों ने डीजल डाल कर जला दिया। करीब 90 प्रतिशत जल चुकी ममता को इलाज के लिए शहर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
मृतका के पिता ने पति प्रवीन, चचिया ससुर रघुवीर सिंह, चचिया ससुर के बेटे दिलीप उसकी पत्नी बेबी देवी व सास जमुना देवी को नामजद करते हुए बेटी को डीजल डालकर जलाने की रिपोर्ट राया थाने में दर्ज कराई थी। इलाज के दौरान ममता ने करीब पांच दिन बाद दम तोड़ दिया। मरने से पूर्व ममता के मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दर्ज हुए थे।
मृत्यु पूर्व दिए बयान में ममता ने पति, चचिया ससुर, चचिया सास, सास व चचिया ससुर के बेटे द्वारा डीजल डालकर जलाने की बात कही थी। मुकदमे की सुनवाई जिला जज आशीष गर्ग की अदालत में हुई। जिला शासकीय अधिवक्ता शिवराम सिंह तरकर ने बताया कि अदालत ने मृतका के मृत्यू पूर्व मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए बयानों को आधार मानते हुए पति, चचिया ससुर, चचिया सास, उनके बेटे और सास को ममता को जिन्दा जला कर उसकी हत्या करने का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।