वृंदावन। गोविंद घाट स्थित श्रीहित रासमंडल में खिचड़ी महोत्सव की धूम है। यहां प्रतिदिन मंगला आरती से पूर्व श्रीजी के नाम सेवा मंदिर में पंचमेवा युक्त एक विशेष खिचड़ी का भोग लगाया जा रहा है। साथ ही उनके सम्मुख प्रख्यात राधावल्लभीय संतों की खिचड़ी से संबंधित वाणियों का संगीत की मृदुल स्वर लहरियों के मध्य गायन किया जा रहा है। इस दौरान श्रीजी को ठंड से बचाने के लिए चांदी की अंगीठी में चंदन की लकड़ी रख जलाया जा रहा है।
श्रीमहंत लाड़िली शरण महाराज व बाद ग्राम स्थित श्रीहितहरिवंश महाप्रभु की जन्मभूमि के महंत श्रीहितदम्पति शरण काका महाराज ने कहा है कि ब्रज में ठाकुरजी की भावमयी सेवा होती है। क्योंकि ठाकुरजी भाव व भक्ति से अत्यधिक प्रसन्न होते हैं। भक्त अपने आराध्य को अपनी भावना से ही रिझा सकता है। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. गोपाल चतुर्वेदी व आचार्य विष्णुमोहन नागार्च ने कहा कि श्रीधाम वृंदावन के विभिन्न राधवल्लभीय मंदिरों में प्रतिवर्ष खिचड़ी महोत्सव आयोजित करने का शुभारंभ 18वीं शताब्दी में गोस्वामी ब्रजलाल महाराज ने किया था। उनके द्वारा रचित ग्रंथ सेवा विचार में इस उत्सव का विस्तृत वर्णन है।
रसिक संत पुरुषोत्तम पुजारी महाराज व संत रसिक माधव दास महाराज ने कहा कि राधवल्लभीय मंदिरों में भोग के साथ राग का भी अत्यधिक महत्व है। डॉ. चंद्रप्रकाश शर्मा व युवा साहित्यकार डॉ. राधाकांत शर्मा ने कहा कि श्रीधाम वृंदावन में प्रतिवर्ष प्रात:काल लगभग 2 घंटे चलने वाले खिचड़ी महोत्सव की धूम अद्भुत, निराली व दर्शनीय होती है। रासाचार्य स्वामी देवेंद्र वशिष्ठ, दिनेश सिंह तरकर, सिंहपौर हनुमान मंदिर के महंत सुंदर दास महाराज, पंडित बिहारी लाल वशिष्ठ, श्रीहितललित वल्ल्भ नागार्च, इंद्र शर्मा, प्रियावल्लभ वशिष्ठ, भागवताचार्य रामप्रकाश भारद्वाज मधुर, भागवताचार्य राकेश शास्त्री, लालू शर्मा व ईश्वरचंद्र रावत आदि थे। संवाद