मथुरा। एक पीढ़ी निकल गई जिसने कीचड़ और सिल्ट में दबे इन घाटों के दर्शन नहीं किए। हर वर्ष नालों और बाढ़ के पानी के साथ आने वाली बालू और कीचड़ इन घाटों की एक या दो सीढ़ियों पर पसर जाती थी। फिर इसके बाद जो ऊपर सीढ़ी रह गईं श्रद्धालु उन्हीं पर पूजा-अर्चना करने लग जाते हैं। पिछले करीब 20-25 वर्षों से बंगाली घाट की निचली सीढ़ी को नहीं देखा। रविवार को जब करीब 8 फुट नीचे घाट की सबसे निचली सीढ़ी दिखी तो काम कर रहे मजदूरों की आंखों में चमक आ गई।
यमुना किनारे रेलवे पुल के सबसे निकट पूजा-अर्चना करने के लिए जो घाट है उसका नाम है बंगाली घाट। करीब 20 मीटर लंबे इस घाट की करीब दस सीढ़ियां कीचड़ से दबी हुईं थीं। दस सीढ़ियों से ऊपर ही लोग पूजा-अर्चना करते थे। तीन दिन पूर्व नगर निगम ने इसके लिए यमुना मिशन को अधिकृत कर दिया। यमुना मिशन नमामि गंगे के कार्यकर्ताओं को साथ लेकर बंगाली घाट की सीढ़ियों की कीचड़ को हटाकर आकलन कर रही है कि यमुना के जल स्रोत तक की गंदगी को किस प्रकार से बाहर निकाला जाए।
शुरूआती काम में उसने एक जेसीबी से करीब इस घाट के दस मीटर क्षेत्र की सीढ़ियों से सिल्ट हटाने का काम शुरू किया है। दो दिन में उसने करीब तीन मीटर लंबाई की घाट की सिल्ट को हटाकर यमुना में ही एकत्रित की है। सिल्ट हटाने का काम यमुना मिशन के प्रमुख कार्यकर्ता अरुण शर्मा की देखरेख में कराया जा रहा है।
बंगाली समाज का विशिष्ट तीर्थ स्थान है बंगाली घाट
जिस घाट से यमुना मिशन द्वारा गंदी सिल्ट हटाने का काम किया रहा है। बंगाली समाज द्वारा इस घाट को तिंदुक तीर्थ के रूप में भी जाना जाता है। बंगाली समाज के अनुयायी इसी घाट पर पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं।
यमुना के स्रोत को खोलने का किया जाएगा प्रयास
यमुना के सभी घाटों की निचली सीढ़ी तक पहुंचने के बाद तैयार किए गए पॉकलेन स्टैंड से यमुना के अंदर जमी सिल्ट को तो हटाया ही जाएगा साथ ही इसे इतनी गहराई तक ले जाया जाएगा ताकि यमुना का जल स्रोत निकल सके। इससे यमुना का नवजीवन मिल सकेगा।
- अरुण शर्मा, प्रमुख कार्यकर्ता यमुना मिशन
यमुना की गंदगी हटने से जल भी होगा साफ
जैसे-जैसे यमुना में फंसी गंदगी हटेगी यमुना शुद्ध होती जाएगी और लोग पूजा-अर्चना करने लगेंगे। हमें भी यमुना की पूजा-अर्चना करने में अच्छा लग रहा है।
मुकेश चतुर्वेदी
यमुना सबकी है इसे शुद्ध करना सबका कर्तव्य
यमुना हम सबकी है। इसे शुद्ध करना हम सबका कर्तव्य है। इसे केवल एक व्यक्ति या संस्था से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
संजीव राधेश्याम