ये होती है कोकोपिट की खाद्य
नारियल के छिलकों को छोटे टुकड़ों में काटकर पानी में भिगो दिया जाता है, इसके बाद इन्हें मिक्सर में पीसकर पाउडर बनाया जाता है। इसमें से अतिरिक्त नमक निकालने के लिए पानी से धोते हैं। फिर इसको निचोड़कर धूप में सुखाते हैं। अंत में पौधों की खाद (वर्मीकम्पोस्ट) के साथ मिलाकर पौष्टिक मिक्स तैयार किया जाता है, जिसे पौध तैयार करने के लिए एक प्लास्टिक की पॉलीथिन में भरकर दिया जाता है।
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हाईटेक नर्सरी में तैयार हैं सब्जियों की पौध
नवकिरण बैंगन की 396, इंडस मिर्च की 1584, नामधारी टमाटर की 3168, नूनहेम्स टमाटर की 2970, वीएनआर हरीमिर्च की 1584, सेमिनिस फूलगोभी की 5940 और पूसा केतकी फूलगोभी की 5940 पौध वर्तमान में तैयार हैं। किसानों को इन्हें दो रुपये प्रति पौध की दर से दिया जाएगा।
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पौध की अधिक होती है अंकुरण क्षमता
इंडो-इस्राइल तकनीक के माध्यम से सब्जियों की उन्नत पौध तैयार की जाती है। इस पद्धति से तैयार पौध किसानों को स्वस्थ, रोगमुक्त और अधिक उत्पादन देने वाली रोपण सामग्री उपलब्ध कराएगी, जिससे खेती की लागत कम होने के साथ उत्पादन और गुणवत्ता भी बेहतर होगी। संरक्षित वातावरण में वैज्ञानिक तरीके से तैयार की जाने वाली पौध की अंकुरण क्षमता अधिक होती है और फसल पर रोगों का प्रकोप भी अपेक्षाकृत कम रहता है। इससे किसानों को समय पर तैयार पौध मिलने के साथ बेहतर पैदावार प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
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जिला उद्यान अधिकारी डॉ. प्रशांत कुमार सिंह ने बताया कि हाईटेक नर्सरी में उच्च गुणवत्ता वाली हाईब्रिड सब्जियों की तैयार की गई पौध को सब्जी उत्पादक किसानों को राजकीय दर पर दी जाएंगी। हाईब्रिड सब्जियों का उत्पादन अधिक होता है। यहां नर्सरी में तैयार की गई पौध रौपे जाने के बाद खराब नहीं होगीं। किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है।
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