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एक दशक में कालोनियों से पट गया यमुना का खादर

Sun, 10 Apr 2016 11:55 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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अवैध निर्माण
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प्रशासनिक स्तर पर हो रही लापरवाही के चलते एक दशक में यमुना के खादर और तटीय क्षेत्रों में दर्जनों कालोनियों का निर्माण हो गया है। इनमें सैकड़ों मकान, मठ, मंदिर, आश्रम और गेस्टहाउस बन गए हैं।
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नगरीय क्षेत्र के समीप जमीन के अभाव में कालोनाइजर यमुना के तटीय क्षेत्रों में अवैध कालोनियों का निर्माण कर प्लाट और मकान बेच रहे हैं। स्थिति यह है कि जहां भी नजर डालो वृंदावन खादर अवैध निर्माण से पटा दिख रहा है।

बीते कई वर्षों से यमुना वृंदावन के घाटों को छोड़ एक किलोमीटर दूर चली गई। इससे पश्चिम तट क्षेत्र में यमुना की खादर बन गईं। इनमें कालोनाइजर नदी से 200 से 500 मीटर की दूरी पर कालोनियां और प्लाट बेच रहे हैं। जिला प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई न होने से आश्रम और मकान बनाने वाले बेखौफ होकर निर्माण कार्य कर रहे हैं।
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चिन्हांकन तक सीमित रही प्रशासनिक कार्रवाई
वृंदावन। एनजीटी में याचिका दायर करने वाले मधुमंगल शुक्ला ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर और धार्मिक महत्व से जुड़े होने के कारण हर किसी का सपना वृंदावन में घर बनाने का होता है। भूमाफिया इसका लाभ उठा रहे हैं। यह लोग यमुना खादर की जमीनों पर प्लाट बेच रहे हैं।

उन्होंने बताया कि वह कई बार जिले से लेकर प्रदेश शासन के अधिकारियों से इसकी शिकायत कर चुके हैं। प्रशासनिक कार्रवाई मात्र चिन्हांकन तक ही सीमित रही है। यमुना तट के वाराहघाट, कालीदह, युगलघाट, बिहारघाट, चीरघाट, जगन्नाथ घाट, पानीघाट के साथ-साथ राजपुर खादर और पानीगांव खादर में अवैध निर्माण किए जा रहे हैं।
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