गांव फालैन में होली पर एक पंडा धधकते हुए अंगारों पर चलता है। इस बार मोनू पंडा ने इस लीला को करने से मना कर दिया है। उनका कहना है कि इस बार शरीर में प्रह्लाद जी से शक्ति का एहसास नहीं मिला है।
मथुरा के कोसीकलां के गांव फालैन में होली के धधकते अंगारों के बीच निकलने वाले पंडा के नाम पर अभी सहमति नहीं बन सकी है। बृहस्पतिवार को गांव में पंचायतों का दौर चलता रहा। ग्रामीणों का कहना था कि 12 मार्च को पंडा के तप पर बैठने से पूर्व निर्णय हो जाएगा। भक्त प्रह्लाद की लीला को साकार कर होली के दहकते अंगारों से निकलने की परंपरा का निर्वहन करने वाले मोनू पंडा ने इस लीला को साकार करने में असमर्थता जताने के बाद गांव में पंचायतों का दौर चल निकला।
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मोनू कई वर्ष से इस परपंरा को लगातार निभा रहे थे। मोनू का तर्क था कि भक्त प्रह्लाद का आदेश होने के बाद ही अंगारों से निकलने की परंपरा का निर्वहन किया जाता है। पिछले कई वर्षों से कृपा मिलती थी और शरीर में भक्त प्रह्लाद जी की शक्ति का प्रवेश होते ही परंपरा का निर्वहन हो जाता था।
इस बार प्रह्लाद जी से शरीर में शक्ति का अहसास नहीं हो रहा है। अगर शक्ति मिली तो वह इस बार भी परपंरा का निर्वहन करेंगे। ग्रामीण कमल सिंह का कहना था कि गांव में पंडा के माला ग्रहण करने से पूर्व पंडा का चयन हो जाएगा। पूर्णिमा यानि 12 मार्च को पंडा मेले की माला ग्रहण करेगा।