वृंदावन। दिल्ली उच्च न्यायालय ने वृंदावन स्थित राधा रानी गोशाला में प्रस्तावित भागवत कथा आयोजन को सशर्त अनुमति देते हुए साफ किया है कि यदि इस धार्मिक कार्यक्रम में किसी प्रकार का चंदा, शुल्क या दान लिया गया तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की एकल पीठ ने यह आदेश संतोष गोस्वामी एवं अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में मृदुल कृष्ण गोस्वामी पर वर्ष 2018 में जारी यथास्थिति बनाए रखने के आदेश की अवहेलना करने का आरोप लगाया गया था।
प्रतिवादी के वकील ने दलील दी कि आयोजन की तैयारियां कई दिनों से चल रही हैं और सैकड़ों श्रद्धालु पहले ही वृंदावन पहुंच चुके हैं। ऐसे में कार्यक्रम रद्द करने से कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है। अदालत ने आयोजन की निगरानी के लिए नकुल शर्मा निवासी वशिष्ठ वट, वृंदावन को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। वह आयोजन की वीडियोग्राफी व फोटोग्राफी कराएंगे तथा यह सुनिश्चित करेंगे कि कार्यक्रम में कोई आर्थिक लेन-देन या दान संग्रहित न किया जाए।
याचिकाकर्ताओं द्वारा यह भी आरोप लगाया गया है कि गोशाला की कई गायों को जयपुर स्थानांतरित कर दिया गया है। अदालत ने इस संबंध में वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट भी अगली सुनवाई में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई की तारीख 17 जुलाई 2025 निर्धारित की गई है।