गिरिराज परिक्रमा संरक्षण को लेकर एनजीटी में फिर सुनाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने नाराजगी भरे स्वर में डीएम से पूछा कि भंडारों का आयोजन और ई-रिक्शा का संचालन किस आदेश के तहत बंद किया गया है। 26-27 अगस्त को लोगों के प्रदर्शन की स्थिति आखिर क्यों पैदा हुई। कोर्ट के आदेश की आड़ में मनमानी न की जाए। इन स्थितियों को देख एनजीटी ने स्थानीय समस्याओं के निराकरण के लिए कमेटी गठित की।
डीएम और एसएसपी की अनुपस्थिति के चलते बुधवार को स्थगित सुनवाई गुरुवार को फिर शुरू हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सार्थक चतुर्वेदी ने न्यायालय को शपथ पत्र के माध्यम से बताया कि ई-रिक्शा, भंडारे, छप्पन भोग को लेकर स्थानीय लोग परेशान हैं। इस पर कोर्ट ने डीएम से पूछा ये सब बंद क्यों हैं। इस पर डीएम के जवाब से असंतुष्ट कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि स्थानीय लोगों को कोई परेशानी न हो।
ऐसी स्थिति में कोर्ट के आदेशों के क्रियान्वयन और स्थानीय लोगों की समस्याओं के निराकरण के लिए कमेटी बना दी। इसमें डीएम, एसएसपी, एडीएम प्रशासन, कोर्ट कमिश्नर, ईओ नगर पंचायत, एआरटीओ तथा एसडीएम गोवर्धन को शामिल किया गया।
निर्देशित किया कि छप्पन भोग, भंडारे तथा ई रिक्शा को अनुमति दें, लेकिन साफ सफाई और परिक्रमार्थियों की सुविधा का इस दौरान विशेष ध्यान रखा जाए। कोर्ट ने थाना अध्यक्ष गोवर्धन को कड़ी फटकार लगाते हुए एक सप्ताह के भीतर 26 व 27 अगस्त को हुई घटना के संबंध में जवाब तलब किया। इस पूरे मामले पर डीएम से भी लिखित जवाब देने को कहा। इस पर डीएम सर्वज्ञराम मिश्र ने बताया कि ये सब करने वालों को चिन्हित कर लिया गया है। उन पर जल्द कार्यवाही की जाएगी।
150 अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट
27 अगस्त को स्थानीय लोगों द्वारा गोवर्धन परिक्रमा क्षेत्र में किए गए विरोध प्रदर्शन के मामले में स्थानीय पुलिस ने 100 से 150 लोगों के खिलाफ कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस ने इसे धारा 144 का उल्लंघन माना है। थाना प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि उक्त अज्ञात लोगों के खिलाफ दुकान बंद कर प्रदर्शन, बलवा व पेट्रोल पंप पर तोड़फोड़ व कर्मचारियों से मारपीट करने की रिपोर्ट दर्ज करते हुए एनजीटी को अवगत कराया है।