वृंदावन (मथुरा)। गंगा प्रदूषण बचाओ संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हरि चैतन्य महाराज ने कहा कि गंगा को लेकर हाईकोर्ट की गई जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने गंगा में पांच हजार क्यूसेक पानी छोड़ने का आदेश दिया था। लेकिन इस आदेश का भी पालन नहीं हो पा रहा है। दस वर्ष से गंगा के लिए न्यायालय में लड़ने के बावजूद आदेशों का पालन नहीं हो पा रहा है। यह बात उन्होंने चैतन्य विहार स्थित दिव्यदेश मंदिर में पत्रकार वार्ता में कही।
उन्होंने कहा कि पूर्ण रुप से नाले बंद नहीं हुए हैं। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी कार्य नहीं कर रहे हैं। सरकार से अपेक्षा थी कि नदी में जल वृद्ध होगी। जिससे नदियों में होने वाला प्रदूषण कम होगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि प्रयाग कुंभ के दौरान गंगा, यमुना को शुद्ध दर्शाया गया था, लेकिन वास्तविकता कुछ और थी। इसका संतों ने विरोध भी किया था। नदियों को प्रदूषण मुक्त करने के लिए सरकारों द्वारा कार्य अति धीमी गति से हो रहा है। हमारा यह उद्देश्य है कि आने वाले माघ मेला में प्रदूषण युक्त जल गंगा में न छोड़ा जाए। दूषित जल का शोधन किया जाए। इस अवसर पर जयप्रकाश मिश्र, श्यामसुंदर पाराशर, माधुरी शरण आदि उपस्थित थे।