इसकी जानकारी जब उसके माता-पिता को हुई, तो उन्होंने उससे संबंध तोड़ लिए। माता-पिता से अलगाव और नशे की गिरफ़्त ने युवती को गहरे अवसाद में डाल दिया। लेकिन अब वह बदलाव चाहती है और इसी उम्मीद से संत प्रेमानंद महाराज के पास पहुंची।
संत प्रेमानंद महाराज ने युवती की बातें सुनकर पहले आश्चर्य जताया और फिर गहरी संवेदना के साथ कहा, "बेटी, अगर तुम सच में सुधार चाहती हो तो स्वयं को बदलने का निश्चय सबसे पहली सीढ़ी है। अगर मन में परिवर्तन की ज्वाला हो, तो कोई भी तुम्हें रोक नहीं सकता।"
महाराज ने युवती को कुछ संकल्प लेने की सलाह दी, जैसे कि आज से नशा पूरी तरह छोड़ देना और विवाह से पहले किसी भी तरह के शारीरिक संबंधों से दूर रहना। उन्होंने नाम जप करने की प्रेरणा दी, जिससे आत्मबल और मानसिक स्थिरता प्राप्त हो सके। संत ने आगे कहा कि आज के परिवेश में ऐसे हालात युवाओं में तेजी से बढ़ रहे हैं, जो बेहद चिंताजनक है। परिजनों को भी सचेत रहना चाहिए।