मथुरा। अनंत चतुर्दशी पर 25 सितंबर को गोवर्धन की तलहटी में होने वाले अलौकिक छप्पन भोग महोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इस बार गिरिराज प्रभु नीलम-पुखराज जड़ित मोरपंखी और सोने की हीरे जड़ित बांसुरी धारण करेंगे। प्रभु का शृंगार सोने-चांदी के आभूषणों के साथ हीरा, पन्ना, मोती, नीलम, गोमेद, पुखराज, माणिक और मूंगा जैसे रत्नों से किया जाएगा।
बुधवार को नाथद्वारा से बनकर आए रजत पात्र का कृष्ण सभागार में जीएलए यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति नारायण दास अग्रवाल ने अनावरण किया। इस दौरान नारायण दास अग्रवाल ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र का मान मर्दन कर ब्रजवासियों की रक्षा की थी। इसी परंपरा में ब्रजवासी गिरिराज प्रभु को छप्पन भोग अर्पित करते हैं। श्रीकृष्ण का जीवन प्रेम, स्नेह और सद्भाव का संदेश देता है।
गिरिराज सेवा समिति के संस्थापक मुरारी अग्रवाल ने प्रभु की छवि पर माल्यार्पण किया। महामंत्री अशोक कुमार आढ़तिया ने बताया कि महोत्सव के लिए कोलकाता और ओडिशा के कारीगरों ने ब्रह्मांड तैयार किया है। 24 सितंबर को पंचरत्न महाभिषेक के साथ स्वामी हरिदास संगीत समारोह होगा।
मुख्य संयोजक राघवेंद्र गर्ग ने बताया कि थाईलैंड, मलयेशिया और मॉरीशस से मंगाए गए फूलों से तलहटी सजाई जाएगी। 25 सितंबर को ब्रज के साधु-संतों के भोज के बाद दोपहर तीन से रात 12 बजे तक श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे। समारोह में संरक्षक राजेंद्र कुमार सर्राफ, भगवान दास खंडेलवाल, संयोजक अनमोल बंसल, दिनेश मंगल, कृष्ण कुमार कन्नू, सुनील बंसल, राकेश गर्ग, नीरज गोयल, लल्लू सिंह आदि मौजूद रहे।
दुग्ध धारा के साथ निकला गिरिराजजी का डोला
अनंत चतुर्दशी पर होने वाले अलौकिक छप्पन भोग महोत्सव से पूर्व बुधवार को भक्तों ने गिरिराजजी के डोले के साथ दुग्ध धारा परिक्रमा की। भक्तों ने प्रभु को छप्पन भोग के लिए न्योता दिया। डोले के साथ चल रहे श्रद्धालु गिरिराज महाराज के जयकारे लगाते रहे। परिक्रमा मार्ग पर जगह-जगह पुष्प वर्षा कर भक्तों का स्वागत किया गया। 24 सितंबर को सुबह 11 बजे पंचरत्न महाभिषेक होगा। कामधेनु गाय के दूध और दुर्लभ जड़ी-बूटियों से प्रभु का अभिषेक किया जाएगा। शाम पांच बजे से स्वामी हरिदास संगीत समारोह होगा।