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शादियों में शर्माते हुए निकले शगुन के लिफाफे

Sat, 12 Nov 2016 01:12 AM IST
अमर उजाला मथुरा
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देवोत्थान एकादशी। यानी चार माह से सो रहे भगवान विष्णु का जाग जाना। शादी विवाह के लिए मंगल घड़ी वाला दिन। इस दिन बड़ी संख्या में शादियां हुईं। मथुरा में ही हर होटल और धर्मशाला बुक थी। देर रात तक धूम-धड़ाका होता रहा। लेकिन शगुन के लिफाफे शर्माए रहे। घबराहट थी कि कहीं कोई झांककर न देख ले। क्योंकि अभी भी लिफाफों में 1000-500 का नोट था। लोग करते भी तो क्या। बड़े नोट बंद होने से 100 के नोट की भी तो किल्लत हो गई है। फिर मजबूरी में लिफाफे का वजन भी हल्का हो गया।      
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अनसूझा सहालग। यानी आज के दिन शादी विवाह के लिए कोई घड़ी या मुहूर्त निकलवाने की जरूरत नहीं होती। हर पल शुभ होता है। ऐसा मानना है ज्योतिषाचार्यों का। यही वजह है कि बड़ी संख्या में विवाह होते हैं। शुक्रवार को मथुरा में ही एक अनुमान के अनुसार करीब 200 शादियां हुईं। छोटे-बड़े सभी होटल बुक थे। धर्मशालाओं से लेकर शहर के बड़े पार्कों तक में मंडप सजे थे। आगे-पीछे चल रही थीं बारातें। फर्क करना मुश्किल हो रहा था कि कौन किसका बाराती। 

ज्योतिषाचार्य अजय कुमार तेलंग के अनुसार मथुरा में डेढ़ सौ से दो सौ शादियां हुई होंगी। हर जगह दावत का तंबू गड़ा था। लेकिन सबसे बड़े दिक्कत शगुन का लिफाफा देते वक्त आई। आमतौर पर पांच सौ का नोट लोग देते थे लेकिन अब 500 का नोट बंद हो गया है और 100 के नोट की बाजार में किल्लत है। लिहाजा तमाम लोग तो ऐसे थे जिन्होंने अभी भी लिफाफे में 500 का ही नोट दिया था। लेकिन बड़े शर्माते हुए। जबकि कुछ ने बड़े नोट बंद होने पर लिफाफा हल्का कर दिया। शगुन के लिफाफे में 250 रुपये ही दिए गए।
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बैंडबाजे पर भी बरसे 10-10 के नोट
बड़े नोट बंद होने से 100 और 50 के नोट की भी बाजार में किल्लत हो गई है। ऐसे में बारातियों ने बैंडबाजे पर भी दस-दस के नोट ही बरसाए। जहां कभी दूल्हे पर उसके दोस्त पांच सौ का नोट दिखाते थे वह भी अब दस रुपये से ही काम चला रहे थे। जबकि कुछ सौ या पचास का नोट लेकर खड़े थे। अगर कोई जेब से पांच सौ का नोट निकालकर दिखाता भी तो दोस्त हूटिंग करने लगते। 

500 के नोट की माला नहीं पहनी दूल्हे राजा ने
एक हजार और पांच सौ के नोट वाली माला बाजार में खूब है। नोटों की माला बेचने वाले रोहताश, कपिल और मंटू ने बताया कि एक हजार और पांच सौ की माला अगर कोई लेगा तो रुपये 100-100 के नोट में ही लिए जाएंगे। लेकिन लेने कोई आ ही नहीं रहा है।
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