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Mathura News: स्टीमर की ठोकरों से टूट रहे घाट, कैसे हो विकास

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मथुरा। एक ओर ब्रजवासी यमुना में क्रूज संचालन देखने को लालायित हैं, तो दूसरी ओर यमुना घाट स्टीमरों के कारण टूट रहे हैं। किनारे पर आते हुए स्टीमर की बार-बार की ठोकर से विश्राम घाट से लेकर बंगाली घाट तक सीढ़ियों, प्राचीन खंभों और बुर्जियों को खासा नुकसान पहुंचा है।
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यमुना के घाट ब्रज की संस्कृति के वाहक और अमूल्य धरोहर हैं। ये घाट बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित भी कर रहे हैं, लेकिन ऐसे श्रद्धालुओं को यमुना विहार कराने वाले स्टीमर के कारण घाटों को नुकसान हो रहा है। बार-बार तेज गति से स्टीमर के घाटों से टकराने से कई जगह पत्थर टूट गए हैं। कई जगह से खंभे टूट गए हैं, तो कई बुर्जियों के पत्थर जर्जर होकर गिर गए हैं। विश्राम घाट के बराबर महाप्रभु वल्लभाचार्यजी की बैठक के पास बनी बुर्जी के पत्थर गिर गए हैं। ऐसे ही बंगाली घाट तक अनेक बुर्जियों के पत्थर गिर गए हैं।

इसको लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि जब स्टीमर से यमुना घाटों को इतना नुकसान हो रहा है तो क्रूज उससे भी बड़ा है, ऐसे में यमुना घाटों का संरक्षण और विकास कैसे हो पाएगा। विश्राम घाट, बंगाली घाट, प्रयाग घाट, श्याम घाट, असकुंडा घाट और स्वामी घाट पर कमोबेश ऐसे ही हालात हैं। गौरतलब है कि वर्तमान में यमुना में करीब एक दर्जन स्टीमर संचालित हैं। इनमें से अधिकांश वृंदावन में केशी घाट और मथुरा में विश्राम घाट के आसपास चलते रहते हैं।
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स्थानीय लोगों ने जताई नाराजगी
बैजनाथ चतुर्वेदी, रविशंकर चतुर्वेदी, सूरज चतुर्वेदी, नीरज चतुर्वेदी और छोटे चतुर्वेदी ने बताया है कि स्टीमर की ठोकरों से यमुना के घाटों को नुकसान पहुंच रहा है। घाटों के सौंदर्यीकरण से पहले जीर्णोद्धार कराया जाए।


यमुना के 20 प्राचीन घाटों के जीर्णोद्धार की कार्ययोजना बनाई जा चुकी है। यमुना पर 1.12 किमी के दायरे में स्थित इन घाटों के लिए मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण ने करीब 50 करोड़ की कार्ययोजना तैयार कर शासन को भेज दी है। मौजूदा घाटों के विस्तार और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी। -नगेंद्र प्रताप, उपाध्यक्ष एमवीडीए
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