यमुना किनारे गंगावतरण का उत्सव धूमधाम से मनाया गया। कालिंदी के घाटों पर
सुबह से ही श्रद्धालुओं का आवागमन शुरू हो गया था। स्नान के बाद विधिविधान
से पूजा अर्चना की गई। बाजारों में शर्बत की प्याऊ और भंडारा प्रसाद वितरण
की होड़ रही। डीजे की धुन पर युवा देर शाम तक झूमते रहे।
गंगा दशहरा
का पर्व यमुना स्नान, पूजा अर्चना और जरूरतमंदों को दान देने की परंपरा के
साथ मनाया जाता है। इस बार विशेष नक्षत्र में यह उत्सव पूरे उत्साह के साथ
मनाया गया। सुबह से ही यमुना के किनारे श्रद्धालुओं की भीड़ जुुटनी शुरू
हो गई। श्रद्धालुओं ने स्नान के बाद पूजा-अर्चना की, यमुना महारानी का दूध
से अभिषेक किया। इसके बाद जरूरतमंदों, ब्राह्मणों को दान देकर पुण्य अर्जित
किया।
श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए ब्रजवासियों ने जगह-जगह शर्बत
की प्याऊ और भंडारे लगाए। डैंपियर नगर, महोली रोड, होली गेट, छत्ता बाजार,
लाल दरवाजा, स्वामी घाट, चौक बाजार, कच्ची सड़क आदि क्षेत्र के लोगों ने
बढ़-चढ़ कर भाग लिया।
छतों पर जमे रहे पतंगबाज
मथुरा। कदम
जमीं पर निगाहें आसमां पर, वो-काटा के स्वरों की गुरुवार को घरों की छत पर,
मैदानों में गूंज रही। दोपहर बाद मौसम में आए बदलाव के बाद तो पतंगबाजों
का उत्साह आसमां छूने लगा। युवाओं ने छत पर डेरा जमा लिया। चरखी ओर मांजे
के साथ आसमान पर टिकी निगाहें बस लापरवाह पतंगबाज की तलाश में रही। निगाह
चूकते ही पतंग आई और वो-काटा के तेज स्वरों के साथ ही चेहरे पर हवाइयां उड़
गईं। इधर पतंगों की बिक्री के लिए बाजार पहले से ही सजा था। मुंहबोले
दामों पर हर कोई बस पतंग खरीदकर छत पर चढ़ने के लिए उत्साहित था। यमुना के
किनारे अलग-अलग गुट बनाकर पतंगबाजी की प्रतियोगिता (पेच लड़ाए गए) का आयोजन
किया गया।
खोया-पाया शिविर लगाया
मथुरा। श्रीमाथुर चतुर्वेद
परिषद के तत्वावधान में विश्राम घाट पर खोया-पाया शिविर का आयोजन किया गया।
इसके अलावा विश्राम घाट पर सामाजिक तत्वों की निगरानी के लिए सीसीटीवी
कैमरे लगाए गए। मुख्य संरक्षक महेश पाठक, अध्यक्ष दिनेश पाठक, महामंत्री
राकेश तिवारी, अरविंद चतुर्वेदी, गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी आदि उपस्थित थे।
निर्जला एकादशी आज
निर्जला
एकादशी का व्रत शुक्रवार को होगा। इस एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहते
हैं। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, दान, धर्म से 21 पीढ़ियों (पिताकुल,
ससुराल, ननिहाल की सात-सात पीढ़ियों) को मोक्ष की प्राप्ति होती है।