वृंदावन। जिला संयुक्त चिकित्सालय में व्यवस्थाओं का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जहां लोग एंटी रेबीज के इंजेक्शन लगवाने के लिए पहुंच रहे हैं, वहां खूंखार कुत्ते बेरोकटोक घूम रहे हैं। मरीज और तीमारदार इन कुत्तों से बचते-बचाते डॉक्टरों के कमरों में जा रहे हैं। सुविधाओं की बात करें तो लाखों रुपये से अस्पताल में लगाए गई लिफ्ट जाम पड़ी है। हैरानी की बात यह है कि जिम्मेदारों का इस ओर कोई ध्यान नहीं है।
सोमवार को अमर उजाला की पड़ताल में अस्पताल की अव्यवस्थाएं सामने आईं। मरीजों के साथ आए तीमारदारों ने बताया कि अस्पताल में कुत्तों के झुंड कई बार वार्ड और उपचार केंद्र तक पहुंच जाते हैं। इससे मरीजों में डर बना रहता है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के साथ अप्रिय घटना की आशंका बनी रहती है। तीमारदारों ने बताया कि कुत्तों की समस्या अस्पताल के कर्मचारियों से कही जाती है लेकिन समाधान नहीं हो पाता है।
इतना ही नहीं अस्पताल में भर्ती बुजुर्ग और गंभीर मरीजों को वार्डों तक पहुंचाने के लिए सीढ़ियों का सहारा लेना पड़ता है, क्योंकि यहां लिफ्ट शोपीस बनी हुई है। लोगों को याद भी नहीं कि लिफ्ट कभी चली थी। अस्पताल के कई वार्डों और परिसर में गंदगी रहती है। तीमारदारों को आरोप है कि किसी कर्मचारी से कहो तो वह सीधे मुंह बात तक नहीं करते हैं।
गेट पर गार्ड भी तैनात
अस्पताल के गेट पर गार्ड भी तैनात रहता है, लेकिन वह कुत्तों को देखने के बाद भी नजरंदाज कर देता है। तीमारदारों का कहना है कि सफाई और कुत्तों के लिए गार्ड से कोई कुछ बोले तो वह लड़ने को तैयार हो जाता है।
वर्जन
पूर्व में गार्ड को हिदायत दी गई थी कि अस्पताल परिसर में कुत्ते नहीं आने चाहिए। एक बार फिर से सख्ती से कहा जाएगा। इमारत में लगी लिफ्ट बंद है। इसके लिए संबंधित संस्था से पत्राचार किया जाएगा।
डा. वंदना अग्रवाल, सीएमएस