16 साल से मुआवजे का इंतजार कर रहे किसानों को जेल में बंद अपनों की रिहाई के लिए अभी और इंतजार करना होगा। शनिवार को न्यायालय द्वारा जमानत दिए जाने के बाद रविवार का सार्वजनिक अवकाश होने से उन्हें रिहाई नहीं मिल सकी। सोमवार को अधिवक्ताओं की हड़ताल रही और मंगलवार को पूर्व राज्यमंत्री के निधन पर शोकावकाश होने के कारण और इंतजार करना होगा।
हालांकि न्यायालय से 11 किसान कैदियों को मिली जमानत की खुशी अब गायब हो गई है। इधर किसान कुंवर सिंह निषाद सहित चार के खिलाफ नए केस दर्ज होने से अब उनकी रिहाई मुश्किल नजर आ रही है। इसके लिए पीड़ित किसान पुलिस प्रशासन को दोष दे रहे हैं। किसानों का कहना है कि शनिवार को न्यायालय में जमानत पर सुनवाई के दौरान किसान परिवार ईश्वर से रिहाई की कामना लेकर हवन यज्ञ में शामिल थे।
उन्हें इस घटनाक्रम की कोई जानकारी नहीं है। पुलिस प्रशासन किसानों का ध्यान मुद्दे से भटकाने के लिए फिर नामजद कर रहा है।
सोमवार को दामोदरपुरा में 65वें दिन धरना जारी रहा। अध्यक्षता सोहन लाल निषाद ने की। संचालन अमर सिंह धनगर ने किया। क्रमिक अनशन पर सत्यप्रकाश और वीरी सिंह बैठे।
श्याम लाल, रामचरन बघेल, दयाल, सुन्ना, देवेन्द्र, ऊदल, सौदान छौंकर, सुंदर छौंकर, गिरवर, शैलेन्द्र निषाद, रामकरन निषाद, जग्गो ठाकुर, आदित्य, रामजीलाल, सुनहरी आदि मौजूद रहे।