मथुरा। जिले के लोगोें को सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। जिला अस्पताल के बेलगाम आधे चिकित्सक केवल ओपीडी करने के बाद आगरा चले जाते हैं। वहां निजी प्रैक्टिस कर कमाई करने के आरोप इन पर लगते रहे हैं। जब भी अधिकारी इन पर लगाम कसने का प्रयास करते हैं तभी मथुरा में सरकारी आवास जर्जर होने की बात कहकर आदेशों को हवा में उड़ा देते हैं। हालात यह हैं कि यदि रात को चिकित्सकों की आवश्यकता पड़ जाए तो यह मिलेंगे नहीं।
चिकित्सा सेवा का कार्य 24 घंटे का माना जाता है। प्रदेश सरकार ने मथुरा में विकास के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए लेकिन चिकित्सा सेवा में सुधार करने का कोई प्रयास नहीं किया है। जिसके चलते जिला अस्पताल सिर्फ क्लीनिक का रूप लेता जा रहा है। जिला अस्पताल में सीएमएस सहित कुल 16 चिकित्सकों मेें से बमुश्किल 8 चिकित्सक ही मथुरा रहते हैं। बाकी चिकित्सक ओपीडी के बाद आगरा चले जाते हैं।
जिला मुख्यालय छोड़ने के बारे में जब भी इन चिकित्सकों को सीएमएस द्वारा कहा जाता है तो कारण बता दिया जाता है कि मथुरा में सरकारी आवास जर्जर हैं रहने लायक नहीं हैं, जबकि जो चिकित्सक मथुरा मेें ही रहते हैं। उनका कहना है कि जब नौकरी करनी है तो यहां पर रहना ही चाहिए। वो भी तो किराये के मकान में रहकर नौकरी कर रहे हैं।
इमरजेंसी में आती है परेशानी
इन चिकित्सकों के आगरा मेें रहने के कारण जब भी इनकी आवश्यकता पड़ती है तो यह उपलब्ध नहीं हो पाते और इमरजेंसी में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। जो चिकित्सक आगरा जाते हैं उनमें से कई चिकित्सक अलग-अलग रोगों के विशेषज्ञ भी हैं।
आगरा जाने वाले चिकित्सकों की शासन से की है शिकायत
जो चिकित्सक आगरा जाते हैं उनकी शिकायत शासन से की है। हर माह हम इस जानकारी को शासन को भेजते हैं लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। आवासों के संबंध में भी शासन को हर माह अवगत कराया जाता है।
- डॉ. आएस मौर्य, सीएमएस जिला अस्पताल