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Mathura News: श्रीबांकेबिहारी मंदिर में हरियाली तीज पर वन-वे और बैरिकेडिंग से होगा भीड़ प्रबंधन

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वृंदावन। ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर में हरियाली तीज के अवसर पर उमड़ने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की तैयारियां शुरू हो गई हैं। पुलिस, प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की संयुक्त बैठक में निर्णय लिया गया कि श्रद्धालुओं के सुगम दर्शन के लिए मंदिर क्षेत्र में वन-वे व्यवस्था लागू की जाएगी, प्रमुख स्थानों पर बैरिकेडिंग होगी और पेयजल सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा।
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इस वर्ष हरियाली तीज का उत्सव 15 अगस्त को मनाया जाएगा, जबकि उससे पहले कामिका एकादशी पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इससे पूर्व तैयारियों को लेकर मोहनबाग में हुई बैठक में एसडीएम सदर मोहित कुमार, सीओ सदर वरुण मिश्रा ने नगर निगम, विद्युत विभाग अधिकारियों, मंदिर प्रबंधन और सेवायतों संग बैठक की। बैठक में मंदिर मार्ग की साफ-सफाई, नालियों की सफाई और विद्युत सुरक्षा को प्राथमिकता देने पर सहमति जताई। मंदिर मार्ग पर लगे विद्युत पैनल बॉक्स को सुरक्षित करने के लिए टेपिंग कराई जाएगी ताकि बारिश के दौरान किसी भी प्रकार की दुर्घटना की आशंका न रहे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर मार्ग के बाहर ही जूते-चप्पल उतरवाने की व्यवस्था भी की जाएगी।

बैठक में श्रीबांकेबिहारी मंदिर हाईपावर्ड कमेटी के सेवायत सदस्य गोपेश गोस्वामी, शैलेंद्र गोस्वामी और हिमांशु गोस्वामी ने भी अपने सुझाव रखे। सेवायतों ने कहा कि हरियाली तीज पर ठाकुर श्रीबांकेबिहारी महाराज आंगन में स्वर्ण झूले पर विराजमान होते हैं। ऐसे में मंदिर परिसर में लगी रेलिंग से जगह कम हो जाती है और श्रद्धालुओं की आवाजाही प्रभावित होती है। इस कारण रेलिंग हटाने का प्रस्ताव रखा गया, जिस पर प्रशासन ने विचार करने की बात कही। बैठक के दौरान मंदिर मार्ग पर बने जर्जर छज्जों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। सेवायत हिमांशु गोस्वामी ने कहा कि नगर निगम ने भवन स्वामियों को नोटिस जारी किए थे, लेकिन अब तक न तो जर्जर छज्जे हटाए गए और न ही निगम ने कार्रवाई की। हरियाली तीज के दौरान लाखों श्रद्धालु इसी मार्ग से गुजरते हैं। ऐसे में यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा हादसा हो सकता है। उन्होंने प्रशासन से आयोजन से पहले खतरे वाले निर्माण हटाने की मांग की। सेवायतों ने यह भी कहा कि मंदिर की संपत्तियों का उपयोग श्रद्धालुओं की सुविधाओं और जनहित से जुड़े कार्यों में प्राथमिकता के साथ किया जाना चाहिए, ताकि देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर व्यवस्थाएं मिल सकें।
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