उत्तर प्रदेश के मथुरा में 24 वर्ष पहले हुए बहुचर्चित विजय इक्का कांड के दो आरोपियों ने एडीजे-4 पल्लवी अग्रवाल की अदालत से गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद खुद को सरेंडर किया। दोनों को कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में लेते हुए जेल भेज दिया। इनमें से एक आरोपी सिपाही सुरेंद्र कुमार सिंह, जो कि बीती 31 जनवरी को आगरा के अछनेरा थाने से सेवानिवृत्त हुए हैं। वहीं, दूसरे सेवानिवृत्त दरोगा विजय कुमार सिंह हैं।
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता एडीजीसी हेमेंद्र भारद्वाज ने बताया कि हाईवे थाना क्षेत्र में स्थित सेंट फ्रांसिस स्कूल में 7 जून 2000 को डकैती व स्कूल के प्रिंसिपल ब्रादर जार्ज क्रूजी की हत्या की वारदात हुई थी। नरहौली थाना (अब हाईवे) में इसका मुकदमा दर्ज हुआ। उस वक्त सुनील कुमार शर्मा इंस्पेक्टर थे।
उन्होंने स्कूल के कुक (खाना बनाने वाले) विजय इक्का निवासी नरहौली को शक के आधार पर पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया था। विजय को थाने से सुनील कुमार शर्मा पुलिस लाइन में ले गया था। पुलिस लाइन के बाथरूम में 17 जून 2000 को विजय इक्का का शव लटका मिला था।
पुलिस हिरासत में हुई विजय इक्का की मौत के मामले में स्कूल के इंचार्ज ब्रादर अलफोन्स ने सुनील कुमार शर्मा के अलावा हेड कांस्टेबल राधेश्याम सिंह पुत्र सीताराम, उप निरीक्षक जमील मोहम्मद रावत पुत्र मकसूद अली रावत निवासी ग्राम गंगावली थाना बीवीनगर बुलंदशहर, सिपाही दिनेश उपाध्याय पुत्र रामभरोसे निवासी मजटीला थाना डौकी, आगरा व कांस्टेबल क्लर्क रामानंद यादव पुत्र शंकर लाल यादव निवासी मटपुरा थाना सैफई, इटावा के खिलाफ सदर थाने में मुकदमा दर्ज कराया।
विवेचना में सीबीसीआईडी ने सुनील कुमार शर्मा के अलावा हेड कांस्टेबल राधेश्याम सिंह, एसआई जमील मोहम्मद रावत, सिपाही दिनेश उपाध्याय, कांस्टेबल क्लर्क रामानंद यादव, इंस्पेक्टर धर्मवीर सिंह, अजय कुमार अग्रवाल, नेत्रपाल दीक्षित, शील कुमार, विजय सिंह, सुरेंद्र सिंह के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।
सुनील शर्मा को बीती 15 जनवरी को अदालत 10 साल कैद की सजा सुना चुकी है। राधेश्याम सिंह, जमील मोहम्मद रावत, दिनेश उपाध्याय, रामानंद यादव को कोर्ट साक्ष्यों व गवाही के आधार पर बरी कर चुकी है। धर्मवीर की मौत हो चुकी है। अजय कुमार अग्रवाल, नेत्रपाल दीक्षित, शील कुमार, विजय सिंह, सुरेंद्र सिंह की पत्रावली को कोर्ट ने इनकी गैर हाजिरी के चलते अलग कर दिया था।
अगस्त 2023 से इनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी थे। मगर, यह कोर्ट में हाजिर नहीं हुए। विजय सिंह, सुरेंद्र सिंह ने बुधवार को कोर्ट में सरेंडर करते हुए वारंट वापसी की प्रार्थना की थी। इनकी प्रार्थना का विरोध किया। इस पर अदालत ने उन्हें जेल भेज दिया है।
नहीं काम आई बीमार होने की दलील
एडीजीसी हेमेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि सुरेंद्र कुमार सिंह ने दलील दी थी कि वह बीमार थे। अदालत में उनसे साक्ष्य मांगे गए। इस पर अदालत को बताया गया कि जिस अवधि में सुरेंद्र कुमार सिंह खुद के बीमार होने की दलील दे रहे हैं। उस अवधि में वह ड्यूटी पर थे। बीमार व्यक्ति ड्यूटी कैसे कर सकता है।
अंतिम बहस में पांच आरोपियों की पत्रावली
अजय कुमार अग्रवाल, नेत्रपाल दीक्षित, शील कुमार, विजय सिंह, सुरेंद्र सिंह की पत्रावली अंतिम बहस में है। अदालत से जल्द इनकी पत्रावली पर निर्णय आने की उम्मीद है।