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बंद कमरे में हुआ समझौता, सार्वजनिक हुआ विवाद

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वृंदावन (मथुरा)। बीते 18 दिन से वृंदावन के संत-धर्माचार्य और द ब्रज फाउंडेशन के बीच चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार को कृष्ण कृपा धाम में समझौते के लिए बुलाई गई बैठक बेनतीजा रही। बंद कमरे में हुआ समझौता बाहर आते-आते बिगड़ गया और दोनों पक्षों में विवाद होने पर बैठक पूरी नहीं हो सकी।
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बीती 10 जनवरी को वृंदावन के श्रोतमुनि आश्रम में संतों-धर्माचार्यों द्वारा द ब्रज फाउंडेशन के अध्यक्ष व पत्रकार विनीत नारायण के खिलाफ अनर्गल टिप्पणी की। विनीत नारायण के समर्थन में देश की विभिन्न उच्च न्यायालय के अधिवक्ताओं ने अनर्गल टिप्पणी करने वाले भागवताचार्य कृष्ण चंद्र शास्त्री ठाकुरजी, कार्ष्णि नागेंद्र, नवलगिरी और महंत फूलडोल बिहारीदास को मानहानि के नोटिस भेज दिए।
इसके बाद कुछ संतों ने सुदामाकुटी में हुई बैठक में विहिप नेता चंपतराय को विनीत नारायण के विरुद्ध जांच कराने संबंधी ज्ञापन देकर विवाद को हवा दे दी। इसके बाद दो फाड़ हुए संत और धर्माचार्य बैकफुट पर आए। संत और धर्माचार्यों ने इस बैठक के लिए चतु:संप्रदाय के फूलडोल बिहारीदास पर ठीकरा फोड़ते हुए अपने को अलग कर लिया। लेकिन फिर भी अंदरखाने सभी को कानूनी कार्रवाई का डर बना रहा।
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शुक्रवार को पहल करते हुए गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने दोनों पक्षों में श्रीकृष्ण कृपा धाम के बंद कमरे में हुई वार्ता में मर्यादा बनाए रखे जाने को लेकर समझौता करा दिया। बंद कमरे में हुए सुलहनामे में उस समय खलल पड़ गया जब सार्वजनिक बैठक में विवाद की परतें खुलने लगीं। बैठक में शामिल अन्य लोग समझौते का आधार जानना चाहते थे, इसे लेकर हंगामा हो गया और समझौता अधर में रह गया। गीता मनीषी संत ज्ञानानंद महाराज बैठक से चले गए।
इस संबंध में कार्ष्णि संत नागेंद्र महाराज ने कहा कि बैठक में संतों और धर्माचार्यों ने 10 जनवरी को दी गई टिप्पणी पर खेद जताने का प्रयास किया है और इस मामले का अंत चाहते हैं। श्री कृष्णचंद्र ठाकुरजी ने कहा कि वह संतों की बैठक में हुई बयानबाजी पर दुख जताते हैं। वहीं द ब्रज फाउंडेशन के अध्यक्ष विनीत नारायण ने कहा कि बंद कमरे में कुछ और बोला गया, जबकि सार्वजनिक तौर पर कुछ और कहा गया।
इस लिए वह इस समझौते का समर्थन नहीं करते। सच्चिदानंद महाराज, लाडलीशरण महाराज, नवल गिरी, स्वामी अद्वैत मुनि, स्वामी सुरेशानंद, मारुतिनंदन बागीश, डॉ. मनोज मोहन शास्त्री, यदुनंदनाचार्य, आचार्य बद्रीश, अशोक व्यास, संजीव कृष्ण ठाकुरजी, मृदुलकांत शर्मा, बिहारीलाल शास्त्री थे।
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