फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mathura News: बाल विवाह की बेदी पर बचपन का बलिदान

विज्ञापन
विज्ञापन
मथुरा। प्रशासनिक तंत्र, सख्त कानूनों और जागरूकता अभियानों के शोर के बीच बाल विवाह जैसी कुप्रथा आज भी समाज में अपनी जड़ें जमाए हुए है। आधुनिक युग में भी यह रुढ़ी परंपरा थमने का नाम नहीं ले रही है। ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में नाबालिग बच्चों की शादी रचाई जा रही है। बुधवार को ऐसा ही एक मामला कोसीकलां से सामने आया है।
विज्ञापन

अधिकारियों के मुताबिक, महाराष्ट्र के अहमदनगर निवासी किशोरी व कोसीकलां निवासी युवक का रिश्ता तय हुआ था। बुधवार को दोनों की कोसीकलां के एक भवन में धूमधाम से शादी कराई जा रही थी। इसी दौरान किशोरी के परिजन शादी कराने से इन्कार करने लगे और महिला कल्याण विभाग के हेल्पलाइन नंबर पर जबरन बाल विवाह कराने की शिकायत कर दी। शिकायत के थोड़ी देर बाद विभाग टीम ने मौके पर पहुंचकर शादी रुकवाई। इसके बाद किशोरी बरामद करके परामर्श केंद्र भेज दिया। हालांकि अधिकारियों का दावा कि विवाह दोनों परिवारों की सहमति से कराया जा रहा था। फिलहाल दोनों परिवारों को चेतावनी दी गई है। फिर भी बाल विवाह कराने का प्रयास किया तो रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी।
इस साल अब तक 50 से ज्यादा बाल विवाह की शिकायतें मिलीं
जिला प्रोबेशन अधिकारी विकास चंद्र ने बताया कि इस साल अब तक 50 से ज्यादा बाल विवाह के मामले सामने आए हैं। इनमें कई मामले ऐसे हैं, जहां शादी की पूरी तैयारी हो चुकी थी और फेरे शुरू होने से ठीक पहले विभाग की टीम ने पहुंचकर शादी रुकवाई। कई बार परिवार शादी को सामाजिक परंपरा बताकर बचने की कोशिश करते हैं।
विज्ञापन

बाल विवाह निवारण अधिनियम 2006 के तहत नाबालिग की शादी कराना अपराध है, लेकिन शिकायत दर्ज कराने से लोग आज भी हिचकिचाते हैं। अधिकतर मामलों में सूचना पड़ोसी, शिक्षक या पंचायत सचिव देते हैं। शादी का सीजन शुरू होते ही बाल विवाह से संबंधति शिकायतों को सिलसिला शुरू हो जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें