भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम ने श्रीबांकेबिहारी मंदिर की काली पड़ चुकी लाल पत्थर की दीवारों की सफाई, केमिकल ट्रीटमेंट और पॉलिशिंग का कार्य पूरा कर लिया है। विशेषज्ञों के अनुसार इससे मंदिर के पत्थर अगले 20 वर्षों तक सुरक्षित रहेंगे और जल्द ही शिखर की दरारों की मरम्मत भी शुरू होगी।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम ने देखरेख के अभाव में काली पड़ चुकीं श्रीबांकेबिहारी मंदिर की लाल पत्थर की दीवारों की सफाई का कार्य करने के बाद पॉलिश कर उसे 20 वर्ष के लिए सुरक्षित कर दिया है। जल्द ही टीम पत्थरों से निर्मित मंदिर के शिखर पर आई दरारों को भरने का कार्य करेगी।
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श्रीबांकेबिहारी हाई पावर्ड प्रबंध कमेटी के निर्देश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की दस विशेषज्ञों की टीम पिछले तीन माह से मंदिर की काली पड़ चुकी दीवारों की सफाई कर उनका केमिकल ट्रीटमेंट करने के बाद पॉलिस करने का कार्य कर रही है। मंदिर की दीवारों की बाहरी सतह के बाद अंदर की सतहों पर छाए कालेपन को साफ किया गया। पत्थर में कीड़ा न लगे इसके लिए कैमिकल ट्रीटमेंट किया जा रहा है। इसके लिए टीम द्वारा मंदिर की दीवारों पर सोडियम पेंटा क्लोरो फेनेट लगाया जा रहा है। इसके सूख जाने के बाद दीवार की सतह पर पॉलिश की जा रही है। यह कार्य अंतिम चरण में मंदिर के प्रवेश द्वारा तीन के आंतरिक भाग की दीवार पर चल रहा है।
पॉलिश हो जाने के बाद जल्द ही मंदिर की दीवारों, छज्जों और शिखर में लगे लाल पत्थरों के बीच में खुले जोड़ों को भरने पॉइंट का कार्य किया जाएगा। संरक्षण टीम में शामिल त्रिलोकी प्रसाद ने बताया कि इस कार्य से मंदिर में लगे पत्थर की उम्र 20 वर्ष तक बढ़ जाएगी। पानी और बाहरी नुकसान पहुंचाने वाले कारकों से दीवारें सुरक्षित रहेंगी। उन्होंने बताया कि मंदिर की बाहरी दीवार पर लगी पॉलीमर को छुड़ाना उनके लिए चुनौती भरा कार्य था। पॉलीमर केमिकल पत्थर को नुकसान पहुंचाता है। पत्थर से इसे छुड़ाना मुश्किल भरा कार्य रहा। जल्द ही मंदिर के शिखर पर पत्थरों के खुले जोड़ों को फिल करने का कार्य शुरू किया जाएगा।