जगन्नाथ पुरी से चैतन्य महाप्रभु के वृंदावन आगमन के सत्य को भक्तों ने भावनाओं से एक बार फिर साकार कर दिया। दो माह सत्रह दिन पैदल चलते हुए गुरुवार को ये यात्रा मथुरा पहुंची तो ब्रजवासी भी स्वागत को आतुर हो गए। यात्रा में शामिल संतों का जगह-जगह पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया।
लगभग पांच सौ साल पहले चैतन्य महाप्रभु जगन्नाथ पुरी से पैदल चलकर वृंदावन पहुंचे थो। यहां उन्होंने ब्रजवासियों को वृंदावन की मौजूदगी का अहसास कराया और ब्रज चौरासी कोस में स्थित लीला स्थलियों के बारे में बताया। तभी से वृंदावन को लेकर चेतना जागृत हुई जो आज विश्व में शिखर को छू रही है।
वृंदावन प्रकाश महोत्सव समिति द्वारा चैतन्य महाप्रभु के वृंदावन में मनाए जा रहे पंचशती समारोह से पहले उनके भक्तों की पदयात्रा गुरुवार को ब्रज में पहुंची। इस यात्रा में शामिल हर एक भक्त परामानंद प्राप्ति का सा अहसास कर रहा था।
आयोजनकर्ताओं में शामिल शरद चंद गोस्वामी ने बताया कि इस यात्रा में लगभग 200 भक्त शामिल हैं। बाबा कृष्ण दास के नेतृत्व में ये यात्रा 5 अगस्त को जगन्नाथ पुरी से शुरू हुई और 2 माह 17 वें दिन मथुरा पहुंची।
गुरुवार को सुबह यात्रा ने विश्राम घाट पर यमुना जी के दर्शन किए और ब्रजरज को मस्तक से लगाकर आनंद की अनुभूति की। इस यात्रा में चैतन्य महाप्रभु के विग्रह के दर्शन कर श्रद्धालु गद्गद् थे।
इस अवसर पर फूलडोल बिहारी दास, मुरारी मोहन, ब्रजमोहन दास, कृष्ण गोपाल देव, गोविंद प्रसाद अग्रवाल, लक्ष्मण प्रसाद, सुनील तिवारी, श्याम सुंदर अग्रवाल, बाबू भाई, हरीबाबू अग्रवाल आदि उपस्थित रहे।
आज से शुरू होगी ब्रज चौरासी कोस यात्रा
शरद चंद गोस्वामी ने बताया कि चैतन्य महाप्रभु की पदयात्रा में शामिल यात्री शुक्रवार से ब्रज चौरासी कोस की यात्रा शुरू करेंगे। इस यात्रा में भगवान श्रीकृष्ण की लीला स्थलियों का आनंद लेते हुए प्रभु श्रीकृष्ण के लीला चिह्नों के दर्शन का लाभ लेंगे।
संकीर्तन पर थिरके लोग
यात्रा में ढोल और मृदंग की थाप पर हरे राम-हरे राम, रामा-रामा-हरे-हरे, हरे कृष्णा-हरे कृष्णा की धुन पर श्रद्धालु थिरकते रहे। इस बीच संकीर्तन में आनंदित भक्तों की भजन गायन की प्रतिस्पर्धा ने लोगों का मन मोह लिया।