मथुरा। बकरीद के लिए बाजारों में एक से बढ़कर एक बकरे नजर आ रहे हैं पर जरा सी भी चूक खरीदार को चूना लगा सकती है। बाजार में ऐसे बकरों की भरमार है जिनमें शारीरिक दोष है। उनका दोष छुपाने के लिए विक्रेता तमाम हथकंडे आजमा रहे हैं। ऐसे बकरे की कुर्बानी जायज नहीं मानी जाती है। ऐसे में खरीदार जरा संभल जाएं।
बकरीद के लिए शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में कुर्बानी के लिए बकरा बाजार सजने लगे हैं। विभिन्न स्थानों पर बकरा मंडियां सज रही हैं। इस बार बकरों की बढ़ती कीमतों ने भी लोगों की चिंता बढ़ा दी है। ऊपर से ऐसे बकरे बाजार में खूब हैं जिनमें ऐब (शारीरिक दोष) है। विक्रेता ऐसे बकरे के दोष छुपाकर उसे बेचने की पूरी कवायद कर रहे हैं। भले ही दाम कम मिल जाएं पर बकरा बिक जाए। शरीयत के हिसाब से कुर्बानी का बकरा पूरी तरह से स्वस्थ होना चाहिए। उसमें कोई भी शारीरिक दोष यदि हुआ तो उसकी कुर्बानी जायज नहीं मानी जाती है।
बकरे के लिए कुर्बानी के नियम
- बकरे की उम्र कम से कम 1 वर्ष (दांत निकलने चाहिए) पूरी होनी चाहिए। ज्यादा बूढ़ा भी न हो।
- बकरा पूरी तरह से स्वस्थ होना चाहिए। ऐसा बीमार बकरा जिसकी बीमारी बिल्कुल स्पष्ट हो, कुर्बानी के लिए योग्य नहीं है।
- बकरा काना, अंधा या लंगड़ा नहीं होना चाहिए।
- अत्यधिक दुबला-पतला न हो
- कान या पूंछ कटी न हो
- त्वचा संबंधी बीमारी न हो
- दांत न टूटा हो
बकरों के दोष छिपाने के हथकंडे भी खूब
बाजारों में आ रहे विक्रेता बकरों के दोष छिपाने की खूब तरकीबें लगा रहे हैं। बकरों के सफेद दागों, त्वचा के जख्म, टूटे सींग, चोट के निशान को मेहंदी या रंग से ढका जा रहा है। उम्रदराज बकरों को कम उम्र का दिखाने के लिए दांतों को चमका दिया जाता है। बकरा सुस्त न दिखे इसके लिए उसे स्टेरायड भी दे रहे हैं।
दाम हैं आसमान पर
बाजार में अच्छे नस्ल के बकरों की कीमतें पिछले वर्षों की तुलना में काफी बढ़ गई हैं। व्यापारियों के अनुसार वर्ष 2021 में बकरे के मीट का भाव करीब 300 रुपये प्रति किलो था, जो अब बढ़कर लगभग 80 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। यही कारण है कि बकरे के दाम आसमान पर हैं। खरीदार सलीम अब्बास ने बताया कि स्वस्थ और आकर्षक बकरों की दो लाख रुपये तक पहुंच रही है। मंडी में 25 हजार रुपये से लेकर लगभग दो लाख रुपये तक की कीमत के बकरे हैं। बकरा पालक फिरोज खान का कहना है कि चारे, दवाइयों और परिवहन खर्च में वृद्धि होने के कारण बकरों के दाम बढ़े हैं। उन्होंने बताया कि बाजार में इस समय तोतापुरी, गुलाबी, बरबरा, जमुनापारी, कोटा, सोजत, अजमेरी नस्ल के बकरे बाजार में बिक्री के लिए लाए गए हैं। डीग गेट निवासी फरीद खान बताते हैं कि लोग सामर्थ्य के अनुसार खरीदारी कर रहे हैं। दाम काफी महंगे हैं।
खानपान का रखा जाता है खास ख्याल
बकरों के खानपान पर काफी पैसा खर्च होता है। बकरा पालक साकिब बताते हैं कि खास ताैर से कुर्बानी का बकरा तैयार करने के लिए उन्हें आकर्षक और वजनदार बनाया जाता है। इसके लिए चना, तेल, सूखे मेवे और हरे चारे के साथ साथ इन्हें प्रतिदिन 3 लीटर दूध भी पिलाया जाता है। मल्टी विटामिन, मल्टी मिक्चर आदि दिया जाता है।