राष्ट्रीय उद्योग व्यापार संगठन की राष्ट्रीय कार्य समिति की बैठक में एक स्वर से मांग उठी कि जिस तरह जीएसटी पर सभी राजनीतिक पार्टियों से राय ली गई, उसी तरह व्यापारिक संगठनों से वार्ता कर समस्याओं के समाधान के बाद इसे लागू किया जाए। बैठक में कुल 15 प्रस्तावों पर मुहर लगी। रविवार को राष्ट्रीय महाधिवेशन का आयोजन किया जाएगा।
अग्रवाटिका मसानी पर आहूत बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित गुप्ता ने कहा कि ई-व्यापार के चलन के बाद व्यापारियों के सामने रोजी रोटी को बचाने का संकट खड़ा हो गया है। ई कॉमर्स प्लेटफॉर्म से देश का पैसा विदेशों में जा रहा है। इसके विरोध में खुदरा व्यापारी सड़कों पर प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि जिस तरह जीएसटी को पास करने के लिए सभी राजनीतिक दलों से बात की गई, उसी तरह इसे लागू करने से पहले सभी व्यापारिक संगठनों से बात कर समस्याओं का समाधान कराया जाए।
राष्ट्रीय वरिष्ठ मंत्री अजय कुमार गुप्ता ने राष्ट्रीय जन उद्योग व्यापार संगठन के नाम का प्रस्ताव रखा जिसे सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया। राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष दीपक अग्रवाल ने आयव्यय का ब्योरा प्रस्तुत किया। इससे पूर्व बैठक का शुभारंभ समाजसेवी डा. अशोक अग्रवाल ने संचालन जगत नारायण अग्रवाल ने किया।
राष्ट्रीय चेयरमैन रामकिशन अग्रवाल, संतोष चाचा, राजीव जयराम, शानू गुप्ता, मनीष अग्रवाल, अंकुर मित्तल, किशोर गुप्ता, छाजूराम अग्रवाल, राजकुमार अग्रहरी, आलोक आर्य, महेंद्र बंसल, मेघराज गोयल, अमित जैन, पंकज गुप्ता, उमेश भारद्वाज आदि मौजूद रहे।
ये हैं मांगें
- 40 लाख वार्षिक टर्न ओवर वाले व्यापारी जीएसटी से बाहर रखे जाएं।
- ई-व्यापार पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए।
- व्यापारियों की समस्याओं के समाधान के लिए व्यापारी आयोग बने।
- देश में टोल टैक्स को समाप्त किया जाए।
- महंगाई पर अंकुश के लिए जीएसटी की दर 18 प्रतिशत से कम रखी जाए।
- नकद खरीदारी पर लगे टीसीएस को समाप्त किया जाए।