ब्रज चौरासी कोस की यात्रा। यानी भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े सभी लीला स्थलों के दर्शन और उन स्थलों का पूरा इतिहास। मान्यता है कि सावन, भादों, क्वार और कार्तिक में सभी तीर्थ ब्रज में पधारते हैं। इस दौरान भक्त जो भी मन्नत लेकर पहुंचते हैं वह पूरी होती है। परंपरा के अनुसार भाद्रपद से यात्राएं उठती हैं जो कार्तिक पूर्णिमा तक चलती हैं। हालांकि अब आचार्य अपनी सुविधा के अनुसार भी यात्रा का कार्यक्रम तय करने लगे हैं।
इस यात्रा के पीछे मान्यता है कि भगवान कृष्ण से उनकी मैया यशोदा और नंदबाबा ने कहा था कि हमें सभी तीर्थ के दर्शन करने हैं। हमारी इच्छा है कि तुम हमें तीर्थ यात्रा पर लेकर चलो। इस पर भगवान श्रीकृष्ण ने सभी तीर्थों का आह्वान करके उन्हें ब्रज में बुला लिया। यह सभी तीर्थ 84 कोस के दायरे में हैं।
चौरासी कोस में वह सभी स्थान भी आ जाते हैं जहां ठाकुरजी ने लीलाएं की थीं। यह यात्रा चालीस दिन की होती है। मथुरा, बरसाना और वृंदावन से यात्राएं उठती हैं। बड़ी संख्या में कृष्णभक्त इन यात्राओं में शामिल होते हैं। श्रीब्रजजीवन-विट्ठलेश यात्रा संघ की ओर से निकाली जाने वाली यात्रा 13 सितंबर को उठेगी। यात्रा मैनेजर राकेश तिवारी ने बताया कि 10 अक्तूबर तक यात्रा चलेगी। जबकि श्रीराधा रानी वार्षिक ब्रजयात्रा 10 अक्तूबर को बरसाना की माताजी गोशाला से उठेगी। इनके अलावा भी कई दूसरी प्रमुख यात्राएं उठेंगी।
24 पड़ाव होते हैं यात्रा में
चौरासी कोस की इस यात्रा में कुल 24 पड़ाव होते हैं। सबसे ज्यादा दिनों का पड़ाव जतीपुरा में होता है। यहां थोड़े-थोड़े वक्त कृष्ण भक्त समय बिताते हैं।
इन स्थलों से गुजरेगी यात्रा
मथुरा, मधुवन, तालवन, कमोध वन, शांतन कुंड, बहुलावन, राधा कुंड, कुसुम सरोवर, चंद्रसरोवर, जतीपुरा, डीग, परमदरा, कामवन, बरसाना, नंदगांव, कोकिला वन, जाव, कोट वन, पैगाम, शेरगढ़, चीरघाट, बच्छवन, वृंदावन, महावन, लोहवन, श्रीदाऊजी, श्रीमद गोकुल फिर मथुरा में पंचकोसीय परिक्रमा।
कृष्ण लीलाओं से जुड़े यह स्थल होंगे यात्रा में
-360 कुंड, 12 वन, 24 उपवन, सरोवर, चार पोखर, चार ओखर, आठ झूला की ठौर, आठ दाऊजी के दर्शन।
कार और बाइक से भी होती परिक्रमा
जो प्रमुख यात्राएं हैं वह तो समूह में होती हैं। संस्थाएं और बड़े आश्रम इनका आयोजन करते हैं। लेकिन तमाम लोग ऐसे हैं जो कभी भी कार्यक्रम बना लेते हैं और 84 कोस की परिक्रमा लेकर निकल पड़ते हैं। कार और बाइक से भी यात्रा की जा रही है।
ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा यात्रा का शुभारंभ
चैतन्य महाप्रभु के शिष्यों में से एक श्रीपाद सनातन गोस्वामी द्वारा दशकों पहले शुरू की गई ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा यात्रा आज भी जारी है। सोमवार शाम को नगर के प्राचीन मदनमोहन मंदिर से भागवन्नाम संकीर्तन के साथ एक बार फिर ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा पदयात्रा प्रारंभ हुई।
यात्रा में साधु-संत हरिनाम संकीर्तन करते, झांझ-मंजीरे और मृदंग की धुन पर थिरकते हुए चल रहे थे। जगह-जगह आरती उतारकर और पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। यात्रा के अध्यक्ष महंत दीनबंधु दास महाराज ने बताया कि ब्रजचौरासी कोस परिक्रमा यात्रा मथुरा, मधुवन, अड़ीग, राधाकुंड, गोवर्धन, डीग, आदिबद्री, केदारनाथ, काम्यवन, बरसाना, नंदगांव, होडल, शेषशायी, कोसीकलां, मांटवन, राया, दाऊजी, गोकुल, मथुरा होते हुए वृंदावन में आकर समाप्त होगी। उन्होंने बताया कि यात्रा के विश्राम स्थल भी सुनिश्चित किए गए हैं। इस अवसर पर निताईदास, गौरदास, श्यामानंद, विष्णुदास आदि सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद थे।