मथुरा। जिला जेल में माता-पिता के साथ बंद सात बांग्लादेशी बच्चों को उचित संरक्षण के लिए सीडब्लूसी (चाइल्ड वेलफेयर समिति) के सुपुर्द कर दिया है। यह कार्य जेल अधिकारियों ने उच्चाधिकारियों से निर्देश मिलने के बाद किया है।
जिला कारागार में काफी दिन से कुछ बांग्लादेशी माता-पिता बंद हैं। इनके बच्चे भी इनके साथ रह रहे थे। कुल नौ बच्चे छह वर्ष से अधिक उम्र के थे। जो कि नियमानुसार जेल में नहीं रह सकते। जेल अधिकारियों ने उच्चाधिकारियों तथा सीजेएम कोर्ट के आदेश के अनुसार यह बच्चे सीडब्लूसी को सुपुर्द कर दिए।
समिति द्वारा इनमें से सात बच्चों को मथुरा में ही बाल शिशु सदन भेजा गया है। जबकि दो बच्चों की उम्र दस वर्ष से अधिक होने के कारण उन्हें फिरोजाबाद के बाल संप्रेक्षण गृह भेजा जाना था लेकिन माहौल ठीक न होने के कारण फिलहाल उन्हें जेल में ही रखा गया है।
जेल में छह वर्ष तक के ही बच्चे रह सकते हैं
जेल के नियमों के अनुसार केवल छह वर्ष तक के बच्चे ही अपने माता -पिता के साथ जेल में रह सकते हैं। इन्हीं नियमों के कारण बच्चों को न्यायालय में पेश कर सीडब्लूसी के सुपुर्द किया गया है। - शैलेन्द्र कुमार मैत्रेय, वरिष्ठ जेल अधीक्षक जिला कारागार
सात को भेजा बाल शिशु सदन
हमने सात बच्चों को मथुरा के ही बाल शिशु सदन भेजा है। यहां पर केवल दस वर्ष तक के ही बच्चे ही रह सकते हैं। इसलिए दो अन्य बच्चों को फिरोजाबाद के बाल संप्रेक्षण गृह मेें भेजा जाना तय हुआ है परंतु फिरोजाबाद का माहौल अच्छा नहीं है इसलिए उन्हें बाद में भेजा जाएगा। - अर्चना वार्ष्णेय, सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष
इन बच्चों को जेल से बाहर भेजने की प्रक्रिया की गई
रहमान 7 वर्ष तीन माह, तूहीन रहमान 6 वर्ष 6 माह पुत्रियां मुजिबर रहमान हिमी 8 वर्ष 6 माह पुत्री रवि उल्खान मीमा 8 वर्ष 6 माह पुत्री बाबू, मुनीरा 7 वर्ष, माफूजा 6 वर्ष पुत्री मोफीजुल, मासूरा 6 वर्ष पुत्री राजू, रिदाई 10 वर्ष 6 माह पुत्री असद, सागर 10 वर्ष 6 माह पुत्र अलाउद्दीन।