राधाकुंड (मथुरा)। संतान प्राप्ति के लिए मन में अटूट आस्था लेकर लाखों दंपती बृहस्पतिवार की आधी रात संतान प्राप्ति के लिए राधारानी कुंड में स्नान करेंगे। देश के कोने-कोने से श्रद्धालु राधाकुंड पहुंच चुके हैं। प्रशासन ने भी मेले की तैयारियों को अंतिम रूप दिया है।
पुराणों में लिखा है कि कार्तिक मास में अष्टमी के दिन राधाकुंड का निर्माण राधारानी ने अपने कंगन से किया था। कृष्ण कुंड का निर्माण भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी वंशी से किया था। मान्यता है कि अहोई अष्टमी की आधी रात को जो नि:संतान दंपती हाथ पकड़ कर तीन डुबकी लगाते है और कुंड में पैंठे का फल लाल कपड़े में बांध कर दान करते हैं। उन्हें वर्ष भर में पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है। बृहस्पतिवार की रात 11:53 बजे से विशेष स्नान प्रारंभ होगा। जो सुबह 4 बजे तक चलेगा।
राधाकुंड और श्यामकुंड की विशेषता
राधाकुंड व श्याम कुंड की मान्यता यह है कि दोनों कुंडों का जल अलग-अलग रंग का है। राधारानी कुंड का जल सफेद, जबकि भगवान श्याम सुंदर के कुंड के जल का रंग श्याम है। राधारानी का कुंड आयताकार है। भगवान श्याम सुंदर का कुंड भगवान के मुकुट जैसा आकार लिए है।
राधाकुंड में वाहनों का प्रवेश रहेगा बंद
अहोई अष्टमी मेले में देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु पहुंचेंगे। प्रशासन व नगर पंचायत ने व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया है। सीओ गौरव त्रिपाठी ने बताया की श्रद्धालुओं को ट्रैफिक जाम से परेशानी न हो, इसके लिए वाहनों का प्रवेश नगर में पूर्णता प्रतिबंधित कर दिया गया है।